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कटरा गांव में मलेरिया का प्रकोप, मौत के बाद बांटी जा रही मेडिकेटेड मच्छरदानी

Updated: IST how to rescue
जिन इलाकों में मलेरिया का प्रकोप है, वहां स्वास्थ्य सुविधा का घोर अभाव है।

धनबाद। जिले में मलेरिया का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ रहा है, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है। गढ़वा के रंका प्रखंड के कटरा गांव में मलेरिया से आदिम जनजाति के तीन बच्चों की मौत हो गई। गढ़वा के ही आदिम जनजाति बहुल धुरकी प्रखंड के करवा गांव में पिछले एक सप्ताह में पांच बच्चों की मौत मलेरिया से हो चुकी है।

इससे पहले नवंबर माह में गढ़वा और पाकुड़ में ही मलेरिया से सात बच्चों की मौत हुई थी, नवंबर में ही चक्रधरपुर के खूंटपानी प्रखंड के अरगुंडी गांव में एक ही परिवार के चार समेत दस लोगों की मौत मलेरिया से हुई थी। हालांकि आकड़ों सिर्फ चार की मौत ही दर्शाई जा रही थी।

विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष एक नवंबर तक राज्य में केवल चार लोगों की मौत मलेरिया से हुई है। दुमका और लातेहार में एक और पूर्वी सिंहभूम में दो। दरअसल जिन इलाकों में मलेरिया का प्रकोप है, वहां स्वास्थ्य सुविधा का घोर अभाव है।

सोमवार को गढ़वा के जिला मलेरिया पदाधिकारी, सिविल सर्जन और जिला मलेरिया कंसल्टेंट की टीम ने प्रभावित इलाके का दौरा किया। जिला मलेरिया कंसल्टेंट अरविंद कुमार ने दावा किया कि इलाके में हाउस सर्वे, ब्लीचिंग के छिड़काव आदि किया गया है।

वहीं कितनी मेडिकटेड मच्छड़दानी बांटी गई, इस सवाल पर जिला मलेरिया कंसल्टेंट अरविंद कुमार ने कहा कि 68000 मेडिकेटेड मच्छरदानी मंगवायी गई हैं जिन्हें मंगलवार से बांटा जाना है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य के 24 जिलों में मलेरिया का सबसे ज्यादा प्रकोप पश्चिमी सिंहभूम में है।

जानकारी के अनुसार, यहां मलेरिया के 12028 मरीज हैं, इनमें 9751 पीएफ स्टेज में हैं। पीएफ यानि प्लाजोडियम फेल्सिफर मलेरिया का खतरनाक स्टेज माना जाता है। दूसरा खतरनाक जोन लातेहार जिला है।

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