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15946 परिवारों को डूब क्षेत्र से बाहर कर दिया: पाटकर

Updated: IST Dhar
सरदार सरोवर बांध...धरना दिया, रैली निकालकर सौंपा ज्ञापन

मनावर. सरदार सरोवर परियोजना से मप्र को कितना लाभ होगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। हम यह कतई नहीं चाहते की विकास रुके बल्कि पुनर्वास नीति को स्पष्ट करवाना चाहते हैं। घाटी के दलितों की हालत देख लेनी चाहिए कि वे अपना जीवन स्तर का कैसे पालन कर रहे हैं। दलित, शोषित एवं मजदूर, किसान अपना घर कैसे चला रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन लोगों की दशा देखने वाला कोई नहीं हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी अंतिम व्यक्ति के विकास की बात करती है, वहीं मप्र की शिवराज सरकार उन्हें उजाडऩे में लगी हुई है। आज नर्मदा घाटी से मछुआरों को इस प्रकार नर्मदा से दूर किया जा रहा है, जिस प्रकार मछली को पानी से निकाल देने पर वह तड़पती हुई नजर आती है। सरदार सरोवर के कारण नर्मदा घाटी के 400 धार्मिक स्थल डूबने की कगार पर है, जहां एक मंदिर के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूरे देश में माहौल बना दिया वहीं नर्मदा जैसी पवित्र नदी के तट पर बसे धार्मिक स्थलों, शिवालयों को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। उक्त विचार नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा तहसील प्रांगण के सामने आयोजित एक दिवसीय धरने को संबोधित करते हुए नबआ की नेत्री मेधा पाटकर ने व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि घाटी के किसान मजदूर, ग्रामीण, इमानदारी और स्वावलंबन से अपना जीवन जी रहे हैं। शासन संवादहीन होकर डूब प्रभावितों की हत्या करना चाहता हैं, ताकि इन गांवों के डूब जाने से इनमें भरे हुए पानी को मप्र के मंदसौर, नीमच, पीथमपुर, देवास सहित कई जिलों में स्थापित उद्योगों में भेजा जा सके। जिस प्रकार गुजरात सरकार द्वारा कोका कोला कंपनी से अनुबंध कर 30 लाख लीटर पानी प्रतिदिन देने का करार किया है। वहीं नैनो एवं अन्य कंपनियों को 6 0 लाख लीटर पानी प्रतिदिन दिए जाने का अनुबंध भी गुजरात सरकार कर चुकी है। आज भ्रष्टाचारी सरकारी कार्यालय के पास अपनी दुकानें खोलकर बैठे हैं, वहां पर किसानों को बहला-फुसलाकर या उन पर दबाव बनाकर उन्हें जबरन मुआवजा राशि लेने मजबूर कर रहे हैं। ऐसे दलालों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। हमारा उद्देश्य सरकार की तिजोरी को दलालों के हाथों में नहीं जाने देना है इस दौरान पाटकर ने मनावर तहसील के दलालों का नामजद उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि सरदार सरोवर के 30 में से 28 गेट बंद हो चुके हैं तथा नर्मदा के पानी को नहरों के माध्यम से गुजरात में छोड़ा जा रहा है, ताकि नर्मदा का पानी कम हो सके और आने वाले वर्षा काल में नर्मदा एकदम से उफान पर आ जाए और डूब क्षेत्र के लोगों को वहां से पुलिस बल के द्वारा जबरन हटाया जा सके। पाटकर ने कहा कि सरकार झूठे राजपत्र के आधार पर भ्रामक जानकारियां को प्रकाशित करवा रही है। 141 गांव के 15946 परिवारों को डूब क्षेत्र से अचानक बाहर कर दिया गया है। जबकि वास्तव में 192 गांव एवं एक नगर धरमपुरी डूब में हैं। एक तरफ तो सरकार ऊंचाई पर रहने वाले परिवार को डूब में मान रही है, दूसरी और नर्मदा किनारे बसे कई परिवारों को डूब क्षेत्र से अलग कर रही है। कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र सिंह तोमर द्वारा किया गया। मेधा पाटकर के साथ ग्राम सेमल्दा, नावडातोड़ी, कवठी, एक्कालबारा, धरमपुरी, गोपालपुरा, कोठड़ा, जलखेड़ा से आंदोलन में शामिल होने के लिए भारी संख्या में महिलाओं ने शिरकत की। नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता बंकनाथ मंदिर से रैली के रूप में तहसील के समीप धरना स्थल पर आए, जहां पर 4 घंटे तक अनुशासित एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलनकारी अंत तक बैठे रहे। इसके बाद एसडीएम कार्यालय पहुंचकर एसडीएम जितेंद्र सिंह चौहान को डूब से आने वाली समस्याओं से अवगत करवाया। इस दौरान एसडीएम ग्रामीणों एवं महिलाओं ने एसडीएम से अपनी समस्याएं बताई।

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