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रेत के दाम बढऩे से प्रभावित आवास योजना

Updated: IST Dhar
2 से ढाई हजार रुपए में रेत की ट्राली आसानी से उपलब्ध हो जाती थी, आज उसी ट्रॉली का मूल्य 7 से लेकर 8 हजार रुपए हो गया

मनावर.एनबीए और एनजीटी द्वारा नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों से रेत निकालने पर रोक लगाए जाने के बाद रेत के दाम आसमान छूने लगे हैं। जिसके कारण केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी इसका असर देखा जा रहा है। कभी 2 से ढाई हजार रुपए में रेत की ट्राली आसानी से उपलब्ध हो जाती थी, आज उसी ट्रॉली का मूल्य 7 से लेकर 8 हजार रुपए हो गया है। वहीं आसपास की नदियों से मिट्टीयुक्त रेत करीब 4 हजार रुपए ट्रॉली में बिक रही है। वहीं गिट्टी खदान मालिकों द्वारा गिट्टी एवं बारीक चूरी के रेट भी अचानक बढ़ा दिए गए हैं। अगर छोटे-मोटे रिपेयरिंग कार्य के लिए रेत चाहिए तो 50 किलो रेत के 100 से 150 सौ रुपए स्टॉकिस्ट ले रहे हैं। चूंकि प्रधानमंत्री आवास के अलावा स्वच्छ भारत के अंतर्गत बनने वाले शौचालय भी इससे प्रभावित हो रहे हैं, जबकि पुनर्वास स्थल पर निर्माण कार्य के लिए रेत लाने के लिए छूट दी जा रही है तो फिर प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए मान नदी तथा आसपास की नदियों से रेत लाने की भी छूट दी जाना चाहिए। ताकि हितग्राही को आसानी से रेत उपलब्ध हो सकें। मनावर के लिए नर्मदा का किनारे नजदीक होने के कारण रेत वहीं से उपलब्ध होती थी तथा मान नदी से भी काली रेत का उत्खनन किया जा सकता है, परंतु नदी के किनारों पर रसूखदारों ने अपना कब्जा जमा रखा है। जिसके कारण वहां से रेत लाना मुश्किल है। ऐसी स्थिति में गिट्टी चूरी का भी उपयोग किया जाने लगा था। खदान मालिकों इनके भी दाम बढ़ा दिए हैं, जिसके कारण प्रधानमंत्री आवास योजना की लागत बढ़ती जा रही है।

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