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कागज में 160, जांच में 60 मीटर तालाब

Updated: IST pool investigation photo dhar
ऊंचाई और मिट्टी में भी गड़बड़ी, लाखों का घालमेल, मामला नैनगांव व थुवाटी में तालाब का

धार. कुक्षी विकासखंड के गांव नैनगांव और थुवाटी में लाखों रुपए के तालाब बनाए गए। दोनों तालाब की लागत एक करोड़ से अधिक कागजों में दर्शाई गई थी। जब मामले की शिकायत की गई तो जांच में तालाब की लंबाई और ऊंचाई कम पाई गई। कागजों में तालाब की लंबाई 160 मीटर थी जो जांच में 60 मीटर निकली। जिस तालाब पर 59 लाख रुपए खर्च करना बताया गया। इस तालाब को जांच में मात्र चार लाख रुपए का काम होना बताया गया। इतना ही नहीं जिम्मेदारों ने फर्जी मस्टर बनाकर लाखों रुपए की मजदूरी भी निकाली ली, जबकि तालाब मशीनों से खोदा गया।

थुवाटी में निस्तार तालाब बनाया गया था। जिसकी लागत 84.49 लाख रुपए थी। इसके अलावा नैनगांव में तालाब की लागत 59.92 लाख रुपए थी। दोनों ही मामलों में सामाजिक कार्यकर्ता रियाज खान ने शिकायत की थी। खान ने शिकायत में बताया था कि दोनों तालाब के निर्माण में अनियमितताएं की गई थीं। शिकायत के बाद एक जांच दल का गठन किया गया। जांच दल में मुख्य महाप्रबंधक बक्षी के अलावा अन्य लोग थे। इन लोगों ने सबसे पहले थुवाटी तालाब की जांच की। थुवाटी तालाब के लिए कागजों में लंबाई 160 मीटर बताई थी, जांच के दौरान लंबाई मात्र 60 मीटर ही निकली। वहीं इसकी अधिकतम ऊंचाई 14.53 मीटर लिखी थी, लेकिन जांच दल को ऊंचाई 13.225 मीटर ही मिली। वहीं मिट्टी के कार्य की मात्रा 36 हजार 92.83 घन मीटर थी, लेकिन दल को 11 हजार 900.86 घन मीटर ही मिली।

जांच में टीप लिखी है कि थुवाटी तालाब का कार्य मात्र 36 प्रतिशत हुआ है, इस लिहाज से देखा जाए तो तालाब की लागत 27 लाख 85 हजार 872 है। वहीं 56 लाख 63 हजार 128 रुपए की गंभीर अनियमितताएं पाई गई है। वहीं नैनगांव तालाब में भी ऐसी ही स्थिति नजर आई। नैनगांव तालाब की लागत 59.92 लाख थी। जिसकी लंबाई कागजों में 130 मीटर दशाई थी, लेकिन मौके पर लंबाई मात्र 45 मीटर, ऊंचाई कागजों में 14.6 मीटर, मौके पर मात्र 6.22 मीटर, टॉप विड्थ पांच मीटर, मौके पर 2.50 से तीन मीटर पाई गई। वहीं मिट्टी के कार्य की मात्र कागजों में जिम्मेदारों ने 30 हजार 887.38 घनमीटर लिखी थी, जबकि मौके पर 2151.20 घन मीटर ही पाई गई। जांच दल ने लिखा है कि मात्र सात प्रतिशत कार्य हुआ है। इस लिहाज से देखा जाए तो तालाब में मात्र 4 लाख 17 हजार 311 रुपए खर्च हुए हैं। शेष 55 लाख 74 हजार 688 रुपए की गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच दल ने संपूर्ण राशि निष्फल बताई है।

दर्ज हो एफआईआर

दोनों तालाबों का काम जल संसाधन विभाग मनावर ने कराया था। जांच में तीन अधिकारी दोषी पाए गए हैं। जिन पर एफआईआर की मांग सामाजिक कार्यकर्ता रियाज खान ने की है। हालांकि इन्हें कमिश्नर स्तर से नोटिस मिल चुका है। कार्यपालन यंत्री जल संसाधन मनावर पीके शर्मा, एसडीओ एमआर कोरी, उपयंत्री आरआर चा को नोटिस दिया था। इन लोगों की विभागीय जांच भी प्रस्तावित है, लेकिन वो ठंडे बस्ते में नजर आ रही है। खान ने अपर मुख्य सचिव मप्र शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, आयुक्त मनरेगा भोपाल, संभागायुक्त इंदौर को पत्र लिखा है। पत्र 19 सितंबर को लिखकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने बड़वानी जिले में ऐसे घोटाले के बाद हुई एफआईआर के बारे में भी बताया है।

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