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तंत्र-मंत्र कर पानी बांध रहे अफसर

Updated: IST Dhar
बचे दिनों में राहत शिविर तैयार करने की दौड़ में छूटे पसीने

धार/मनावर. बारिश से राहत शिविर तैयार करने में खलल पैदा न हो इसलिए अब अफसर भी टोने-टोटके करने लगे। रविवार को मनावर डूब क्षेत्र में राहत शिविर तैयार करने वाले कुछ अफसरों ने तंत्र-मंत्र का सहारा लिया और पानी बांधने (बारिश नहीं होने) के लिए देशी टोटके आजमाए। सूत्रों की माने तो एक अधिकारी ने गुपचुप तरीके से एक तांत्रिक की सलाह पर राहत शिविर के पास कुछ पत्थर जमा किए और उन पर सिंदूर, गुलाल लगाकर मंत्र पढ़े, जिससे कुछ दिनों के लिए पानी रोका जा सके। एक ओर किसान पानी के लिए परेशान हंै, वहीं अधिकारी पानी रोकने के लिए इस तरह अंधविश्वास का सहारा ले रहे हैं। डूब प्रभावित गांव खाली करवाने में अब केवल 13 दिन बचे हैं। इससे पहले राहत शिविर तैयार करने की भागदौड़ में अफसरों के पसीने छूट रहे है।

धार एक आदिवासी जिला है, जहां के लोग बढ़वई, भोंपू, झाड़-फूंक आदि में विश्वास करते है, वहीं अब पढ़े-लिखे अधिकारी भी इस तरह के अंधविश्वास की चपेट में आए गए। इसकी चर्चा जोरों पर है।

एशिया का सबसे बड़ा विस्थापन कहे जाने वाले सरदार सरोवर बांध की जद में आने वाले निसरपुर, कलमाड़, चिखल्दा, दसाना, बड़दा, सेमल्दा, एक्कलबारा जैसे बसाहट वाले करीब 50 गांव के डूब प्रभावित लोगों को 31 जुलाई तक राहत शिविरों में पहुंचाना है। इधर, काम पूरा नहीं होने और बरसात शुरू होने से परेशानी बढ़ रही है। अब तक एक भी राहत शिविर तैयार नहीं हो पाया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक अब केवल 13 दिन शेष बचे हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों में राहत शिविर के काम में तेजी आई, लेकिन बारिश के कारण सबकुछ चौपट होने का अंदेशा है। ऐसे में काम के साथ-साथ कुछ अंधविश्वासी अधिकारी इस तरह से पानी बांधने का उपक्रम कर रहे हैं। राहत शिविर पर काम करने वाले एक मजदूर की माने तो रविवार देर शाम एक चश्मे वाले साहब ने कुछ पत्थर जमाए और पूजा-पाठ किया। पूछने पर उन्होंने कहा कि भगवान को मनाएंगे तो कुछ दिन पानी रुक जाएगा और हमारा काम ठीक से हो जाएगा।

पचास गांव बसाने के लिए 39 पुनर्वास

सरकारी तौर पर डूब प्रभावित लोगों को 39 पुनर्वास स्थलों पर प्लाट आवंटित किए गए हैं, लेकिन अधिकांश लोग अब भी वहां अपना मकान नहीं बनाए पाए, इससे उन्हें फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में जिला प्रशासन 15 स्थानों पर राहत शिविर तैयार कर रहा है, जहां विस्थापितों को खुद का मकान बनाने तक आसरा मिल सकेगा। इसके अलावा भी पात्र प्रभावितों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देकर प्रशासन खुद का मकान खड़ा करने में मदद कर रहा है। मसलन, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देकर सवा लाख रुपए की मदद पहुंचाई जा रही है।

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