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आज बने शिव तथा सिद्ध योग, इन कामों को करने से होगा फायदा

Updated: IST aaj ki kundli
द्वितीया भद्रा संज्ञक तिथि प्रात: 7.52 तक, तदुपरान्त तृतीया जया संज्ञक तिथि है

द्वितीया भद्रा संज्ञक तिथि प्रात: 7.52 तक, तदुपरान्त तृतीया जया संज्ञक तिथि है। द्वितीया तिथि की वृद्धि हुई है। द्वितीया व तृतीया तिथियों में यथा आवश्यक समस्त शुभ व मांगलिक कार्य यथा- विवाह, वास्तु, भूषण, यज्ञोपवीत, प्रतिष्ठा, राजकीय कार्यादि शुभ व सिद्ध होते हैं। तृतीया तिथि में गानविद्या, सीमन्तकर्म और कला सम्बंधी शिक्षा व कार्य शुभ होते हैं।

नक्षत्र: ज्येष्ठा 'तीक्ष्ण व तिर्यंकमुख' संज्ञक नक्षत्र रात्रि 11.11 तक, इसके बाद मूल 'तीक्ष्ण व अधोमुख' संज्ञक नक्षत्र हैं, जिनमें उग्र, तीक्ष्ण व दारूण संज्ञक कार्य सिद्ध होते हैं। मूल नक्षत्र में विवाह, यज्ञोपवीत, व वास्तु विषयक कार्य शुभ कहे गए हैं। ज्येष्ठा और मूल दोनों ही गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र है। इनमें जन्मे जातकों की मूल शांति करा लेनी चाहिए। जो जन्म के 27 दिन बाद जब इन नक्षत्रों की पुनरावृत्ति हो, उस दिन करानी चाहिए।

योग: शिव नामक योग सायं 6.44 तक, इसके बाद सिद्ध नामक योग है। दोनों ही नैसर्गिक शुभ योग है। करण: गर नामकरण प्रात: 7.52 तक, तदन्तर रात्रि 9.05 तक वणिज नामकरण तथा इसके बाद भद्रा प्रारम्भ हो जाएगी। रात्रि 11.11 तक स्वर्ग लोक की इसके बाद पाताल लोक की भद्रा है। दोनों ही शुभ है।

शुभ विक्रम संवत् : 2074

संवत्सर का नाम : साधारण

शाके संवत् : 1939

हिजरी संवत् : 1438

अयन : उत्तरायण

ऋतु : ग्रीष्म

मास : ज्येष्ठ। पक्ष - कृष्ण।

शुभ मुहूर्त : उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज विवाह का (अपरिहार्य शनियुति व मासान्त दोषयुक्त) मूल नक्षत्र में अतिआवश्यकता में अशुद्ध व वधू-प्रवेश का शुभ मुहूर्त है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज प्रात: 7.24 से प्रात: 9.04 तक शुभ तथा दोपहर 12.23 से सायं 5.22 तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत के श्रेष्ठ मुहूर्त हैं एवं दोपहर 11.56 से दोपहर 12.49 तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज द्वितीय शनिवार है। दिशाशूल: शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज उत्तर दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है। चन्द्रमा: चन्द्रमा रात्रि 11.11 तक वृश्चिक राशि में, इसके बाद धनु राशि में है। राहुकाल: प्रात: 9.00 से 10.30 बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासम्भव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे

आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (या,यी,यू,ये,यो) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। रात्रि 11.11 तक जन्मे जातकों की जन्म राशि वृश्चिक व इसके बाद जन्मे जातकों की जन्म राशि धनु है। सभी का ताम्रपाद से जन्म हुआ है। सामान्यत: ये जातक चतुर, चालाक, सब कार्यों में होशियर, कलहप्रद, जीवनयापन, विद्या व काव्य पक्ष में पूर्ण सफलता पाने वाले, छिद्रान्वेषी, अर्थाभाव से गुजरने वाले पर संतान की दृष्टि से भाग्यशाली होते हैं। इनके 13-27-31 व 49वें वर्ष स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छे नहीं निकलते। वृश्चिक राशि वाले जातकों को आज मानसिक विचलन व तनाव की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है। अचानक कोई हानि हो सकती है।

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