Patrika Hindi News

रेत माफियों की नजर नदी और पत्थर पर 

Updated: IST indrawati- jora nala
खनिज विभाग पर लगातार उठाई जा रही उंगलीठेकेदार से कौन कराएगा टेंडर की शर्तों का पालनरेत सप्लायर भी कर चुके हैं विरोध

डिंडोरी। जिले की रेत खदानों से हो रही रेत की अवैध निकासी और रेत के व्यापार को लेकर बनाए गए नियम-शर्तों का खुलेआम उलंघन हो रहा है। ठेकेदार जहां टेंडर के नियम-शर्तों को धता बता रहे हैं। वहीं रेत व्यापार से जुड़े लोग भी खनिज विभाग सहित जिला प्रशासन पर मिली भगत के गंभीर आरोल लगा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिले में रेत माफियाओं पर लगाम लगाने और टेंडर के नियम-शर्तों का पालन कराने के लिए जिला प्रशासन को कौन सा अधिकारी सामने आएगा। इस मामले को लेकर जिले के आधा दर्जन से अधिक रेत सप्लायर कलेक्टर को शिकायत भी कर चुके हैं।
जिले में प्रमुख रेत खदान दीवारी से 20-20 टन से अधिक भार के वाहन प्रधानमंत्री योजना की सड़कों पर नियमविरूद्ध दौड़ रहे हैं। भारी वाहनों से गांव की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना हो रही है और खनिज विभाग सहित राजस्व विभाग भी मौन बना हुआ है। रेत माफियाओं पर कार्रवाई न होना खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की मिलीभगत की तरफ भी उंगली उठाने को मजबूर करता है।
गौरतलब है कि अमरपुर क्षेत्र में स्थित दीवारी खदान से बड़े-बड़े वाहनों से रेत ढोई जा रही है। यह खदान शहडोल के किसी ठेकेदार की बताई जाती है। यहां पर क्षमता से अधिक वाहनों को भरा जाता है। टेंडर की शर्तों का भी पालन नहीं हो रहा है। मोटर व्हीकल एक्ट व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना हो रही है। डंपर, ट्रकों में निर्धारित भार से अधिक रेत ढोई जाती है। ज्ञात हो कि टेंडर की शर्त 23 में यह उल्लेख है कि जिले की सड़कों पर रेत परिवहन केवल 6 पहिया वाहन से कि या जाए। एक वाहन में 12 घन सेंटीमीटर से अधिक रेत नहीं ढोई जा सकती है। शर्त 24 में भी कहा गया है, कि ठेकेदार पेाकलेन और जेसीबी मशीन से नदी से रेत नहीं निकाल सकता। जिले की दीवारी सहित अन्य खदानों में खुलेआम पोकलेन मशीन और जेसीबी का उपयोग किया जाता है।
विगत सप्ताह रेत ठेकेदार की मनमानी से तंग आकर जिले के रेत सप्लायरों ने अपने डम्फरों को खड़ा करके विरोध प्रदर्शन किया था। सप्लायरों ने आरोप लगाया था कि ठेकेदार अपने दस चकों के डम्फरों से बिना रायल्टी के रेत बेचकर नियमों का उलंघन कर रहा है। जब चाहे रेत की रायल्टी के मनमाने दाम बड़ा दिए जाते हंै, जिसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ रहा है। रेत सप्लायरों का आरोप है कि खनिज विभाग और पुलिस विभाग का अमला रेत ठेकेदार के इशारे पर काम कर रहा है। कहा गया कि एक ओर रेत सप्लायर रायल्टी लेकर रेत का परिवहन करते हैं, वहीं रेत ठेकेदार के वाहन बिना रायल्टी के रेत का परिवहन करते हैं। इसके बाद भी खनिज और पुलिस विभाग का अमला बिना रायल्टी बाले वाहनों को छोड़कर रेत सप्लायरों के वाहनों पर कार्रवाई करता है।
दिए गए ज्ञापन में रेत सप्लायरों ने कहा कि रेत खदान के ठेकेदार विजय जसवानी द्वारा पहले चक्कर में रॉयल्टी की शुल्क 4500 रूपए वसूल किए जाते हैं। जिस पर रॉयल्टी का मूल्य नहीं लिखा जाता। यदि हम दूसरा चक्कर लगाते हैं तो हमे रॉयल्टी नहीं दी जाती और रेत का पूरा मूल्य 4500 रूपए चुकाना पड़ता है। पोकलेन मशीन द्वारा पानी के अंदर से ट्रकों में रेत भरी जाती है। दस पहिया वाहन जो कि रेत खदान पर पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, उसके बाबजूद नियमों को ताक पर रखकर रेत का परिवहन किया जाता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क भारी वाहनों से चौपट हो गई है। माइनिंग की दर से 10 गुना अधिक शुल्क गाड़ी मालिकों से वसूला जा रहा है। दिवारी खदान में रॉयल्टी को कोई निर्धारित रेट तय नहीं है। ठेकेदार मनमर्जी से कभी भी राशि बड़ा देता है। पोकलेन मशीन और जेसीबी मशीन के द्वारा प्रति चक्कर 2 हजार रूपए गाडिय़ों की भराई राशि ली जाती है। ठेकेदार गरीब मजदूरों का शोषण कर रहा है। दिवारी खदान ठेकेदार विजय जसवानी द्वारा चेक से किसी भी प्रकार की राशि नहीं ली जाती है। प्रशासन हाथ-पर-हाथ रखे बैठा है।
वाहनों की धमाचौकड़ी से जिले के जलेगांव, दिवारी, खितगांव सहित अन्य गांवों में सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। जिला प्रशासन इन वाहनों की आवाजाही पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। इन गावों के ग्रामीणों को विगत कुछ बर्ष पहले काफी मशक्कत के बाद सड़क नसीब हो सकी थी लेकिन यहां पर जिले की प्रमुख रेत खदान होने के कारण यहां पर प्रतिदिन सैकड़ों रेत वाहनों की धमाचौकड़ी से अब इन सड़कों के परखच्चे उडऩे लगे हैं।
जबकि इन सड़कों पर भारी वाहनों को आना जाना प्रतिबंधित है। विगत बर्ष18 नवंबर 2015 को तत्कालीन कलेक्टर छवि भारद्वाज ने धारा 133 (1)(क) के तहत आदेश पारित किया था कि डिंडोरी जिले में मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के तहत आने वाली समनापुर बिछिया से खितगांव मार्ग एवं खितगांव से दिवारी माल सहित जिले की सभी मप्र ग्रामीण विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित सड़कों पर कोई भी वाहन जिसका कुल भार आठ टन से अधिक हो नहीं चलाया जाएगा यदि किसी व्यक्ति द्वारा इस आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो वह भारतीय दण्ड विधान की धारा 188 के अंतर्गत दण्ड का भागी होगा।
ठेकेदार को विगत वर्ष ही सिया से एनओसी मिल गई थी। हमोर विभाग पर जो आरोप रेत सप्लायरों ने लगाए हैं, उनके जबाब भी वही लोग दे सकते हैं। जहां तक प्रधानमंत्री सड़कों के जर्जर होने की बात है, तो वह कार्य हमारा नहीं है। ओवर लोड वाहनों पर कार्रवाईयां होती हैं।
एचपी सिंह, खनिज अधिकारी डिंडोरी।

यह भी पढ़े :
विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ?भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???