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हार्मोनल बदलाव से अधिक होता है महिलाओं में डिप्रेशन

Updated: IST depression in women
विभिन्न रोगों की जांच व परीक्षण में अक्सर तनाव अहम कारण बनकर उभरता है। जिसका समाधान जरूरी है।

'विश्व स्वास्थ्य दिवस' की थीम इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 'डिप्रेशन-लेट्स टॉक' रखी है। इस अभियान का उद्देश्य ज्यादातर लोगों, परिवारजन और दोस्तों को रोग और रोगी की मदद के लिए जागरुक करना, इसके परिणाम व उपचार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना है। विभिन्न रोगों की जांच व परीक्षण में अक्सर तनाव अहम कारण बनकर उभरता है। जिसका समाधान जरूरी है।

महिलाओं में हार्मोनल बदलाव से अवसाद की दोगुनी आशंका रहती है। किशोरावस्था से वृद्धावस्था तक निरंतर ये बदलाव होते हैं जिनका मानसिक व शारीरिक स्तर पर असर होता है। तीन प्रमुख स्थितियों में हार्मोन्स में बदलाव से अवसाद होता है-

लिव-वैल: किशोरावस्था से वृद्धावस्था तक निरंतर ये परिवर्तन मानसिक व शारीरिक स्तर पर असर छोड़ते हैं।

किशोरावस्था : 10-15 वर्ष की आयु में हार्मोन्स में बदलाव मासिक चक्र की शुरुआत का संकेत है। मासिक चक्र के 3-4 दिन पहले से चिड़चिड़ापन, तनाव, सिरदर्द जैसे लक्षण 'प्री-मेन्स्ट्रुअल टेंशन' के हैं।

गर्भावस्था: इस दौरान हार्मोनल बदलाव से अकारण स्वभाव बदलना या उदासीनता जैसे लक्षण सामने आते हैं। ऐसे में महिला आने वाले शिशु से जुड़ी सेहत का तनाव ज्यादा लेती है।

प्रसव के बाद : कुछ महिलाओं में यह स्थिति गंभीर डिप्रेशन की बनती है। इस दौरान वह अवसाद से घिरे रहने के कारण शिशु को संभाल न पाने व बेवजह रिश्तेदारों पर शक करती रहती हैं।

10 प्रतिशत लोग दुनियाभर में किसी न किसी तरह के तनाव और अवसाद से उम्रभर परेशान रहते हैं। 20 प्रतिशत महिलाओं में एक शोध के अनुसार जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर डिप्रेशन पाया गया।

मेनोपॉज के दौरान परेशानी
माहवारी बंद होने पर अंडाशय से अंडा बनने की प्रक्रिया बंद होने के साथ एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर घटता है। कम उम्र में अप्राकृतिक रजोनिवृत्ति (सर्जरी से गर्भाशय/अंडे बनने की क्रिया बंद करना या कैंसर का इलाज) से बेचैनी, थकान व चिंता जैसे लक्षण जल्दी व ज्यादा होते हंै।

ऐसे पहचानें अवसाद
अनियमित माहवारी, गर्मी के बफारे/ लहर, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में जकडऩ, वजन बढऩा, अपच, बार-बार यूरिन जाना, अनियमित हृदय की धड़कनें, चक्कर आना व सिरदर्द, बेचैनी, अनिद्रा, थकान प्रमुख हैं। कम एस्ट्रोजन का स्तर दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर में गड़बड़ी कर स्वभाव पर नकारात्मक असर करता है।

बीमारी रोकने के 5 प्रमुख उपाय
कई शोधों के अनुसार मानसिक, सामाजिक, शारीरिक गतिविधि और अच्छे पोषण से मस्तिष्क की सेहत सुधरती है।

खानपान हो पौष्टिक
फल, सब्जियां, सूखे मेवे, जैतून का तेल, साबुत अनाज, अंकुरित अनाज, दूध, पनीर, सोयाबीन, आलू, ब्रोकली और अंडे खा सकती हैं। जंकफूड, कोल्डडिं्रक, शराब व धूम्रपान से दूरी बनाएं।

शारीरिक गतिविधि
हार्मोन्स को सुचारू रखने के लिए फिजिकल एक्टिविटी जैसे एरोबिक्स व हल्का-फुल्का व्यायाम करें। मानसिक उत्तेजना बढ़ाने के लिए शतरंज खेलें या पढ़ाई-संगीत से जुड़े रहें।

धार्मिक व सामाजिक कार्य
ध्यान, योग व पूूजा से अवसाद में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं और ये तनावमुक्तजीवन के लिए अच्छे उपाय हैं। सामाजिक रूप से खुद को जोड़े रखने पर रचनात्मक संचार बढ़ता है।

हार्मोन थैरेपी भी कारगर
एम.एच.टी यानी मेनोपॉज हार्मोन थैरेपी से रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाले लक्षणों को कम कर सकते हैं। यह मेन्टल टॉनिक के रूप में हार्मोन्स के संचार को बेहतर करती है।

डॉक्टरी सलाह
अवसाद की गंभीर अवस्था में मनोचिकित्सक के निर्देशानुसार एंटीडिप्रेसेन्ट दवाएं ले सकते हैं।

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