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भिलाई नरबलि कांड: तांत्रिक दंपती को फांसी और शिष्यों को उम्रकैद की सजा 

Updated: IST Bhilai Narbali case: in the second case will tantr
नरबलि कांड के अभियुक्त तांत्रिक दंपती की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। वहीं दूसरे प्रकरण में फांसी की सजा को यथावत रखा।

दुर्ग. हाईकोर्ट ने एक दिन पहले नरबलि कांड के एक मामले में अभियुक्त तांत्रिक दंपती की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। वहीं दूसरे प्रकरण में तांत्रिक दंपती की फांसी की सजा को यथावत रखा है और उनके सहयोगी शिष्यों की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है।

फांसी की सजा को यथावत रखा

बिलासपुर हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजय के अग्रवाल की खंडपीठ ने रुआबांधा निवासी तांत्रिक ईश्वरी लाल यादव 38 साल और उसकी पत्नी तांत्रिक गुरु किरण 36 साल की फांसी की सजा को यथावत रखा। तत्कालीन जिला सत्र न्यायाधीश गौतम चौरडिय़ा ने तांत्रिक के पांच शिष्य सुखदेव 35 साल, निहालुद्दिन उर्फ खान बाबा 60 साल, हेमंत 28 साल व राजेन्द्र 23 साल को भी बराबर का दोषी माना था। इन पांचो को भी फांसी की सजा सुनाई थी।

अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन पांचों सहआरोपी को दी गई फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।जिला न्यायालय में मार्च 2014 में फैसला सुनाया गया था। जिसे अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिला न्यायालय में हत्या के अलावा मासूम के अपहरण के मामले में धारा 364 के तहत आजीवन व साक्ष्य छुपाने के लिए धारा 201 के तहत पांच वर्ष कारावास की सजा दी थी। तीनों धाराओं के तहत 15-15 हजार रुपए जुर्माना भी किया गया था। हाईकोर्ट ने इसे यथावत रखा गया है।

जाने 23 नवंबर 2011 को क्या हुआ था

तांत्रिक दंपती ने अपने सहयोगी शिष्यों के साथ मिलकर रुआबांधा में ही पड़ोस में रहने वाले पोषण राजपूत के 2 साल के मासूम बेटे चिराग का पहले अपरहण किया। बाद में काली माता के सामने अनुष्ठान करते हुए उसकी बलि चढ़ा दी थी। अभियुक्त तांत्रिक विद्या से धन व ऐश्वर्य हासिल करना चाहते थे। इसके लिए तांत्रिक दंपती ने नरबली की योजना बनाई थी। इस घिनौने अपराध को अंजाम देने में तांत्रिक दंपती ने अपने शिष्यों व बच्चों को शामिल किया था।


चार आरोपी नाबालिग

इस प्रकरण में पुलिस ने 12 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें से एक आरोपी कृष्णा उर्फ तम्बी अब तक फरार है। चार नाबलिग का प्रकरण किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें दो बच्चे तांत्रिक दंपती की संतान है।

कोर्ट के इतिहास का सबसे बड़ा फैसला
जिला न्यायालय के इतिहास में मार्च 2014 को सुनाया गया यह सबसे बड़ा फैसला माना गया। रुआंबाधा बस्ती में हुए नर बलि के मामले में तत्कालीन सत्र न्यायाधीश ने सात लोगों को एक साथ मृत्यु दंड की सजा सुनाई थी। सजा के लिए गवाहों और फोरेंसिंक रिपोर्ट को आधार बनाया गया था। फैसला 52 पृष्ठों में था जिसे हाईकोर्ट में चुनाती दी गई थी।

तांत्रिक पुत्र ने अपहरण किया

मासूम चिराग को बली देने तांत्रिक ईश्वरी लाल यादव का नाबालिग पुत्र व एक अन्य अभियुक्त हेमंत साहू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों ने मासूम को उसके घर से उठाकर सीधे पूजा स्थल पर गए। घटना की खबर कि सी को न हो इसके लिए आरोपियों ने घर पर तेज आवाज में डेक बजाना शुरु कर दिया।

घटना के समय खेल रहा था चिराग

घटना के समय मासूम का पिता पोषण सिंह व मां सावित्री मजदूरी करने चले गए थे। घर पर सावित्री की छोटी बहन पुनिया उर्फ वंदना थी। मासूम उसी के साथ घर के आंगन में खेल रहा था। पुनिया के कमरे में प्रवेश करते ही आरोपियों ने मासूम का अपहरण कर लिया।

मासूम के गुम होने पर यह किया

मासूम के गुम होने की सूचना सबसे पहले पुनिया ने अपनी दीदी व जीजा को दी। इसके बाद पूरा मोहल्ला मासूम की खोजबीन करने लगा। नागरिकों ने मस्जिद में लगे लाऊड स्पीकर से सूचना प्रसारित किया। इसके बाद भी मासूम का कहीं पता नहीं चला। परिजन गुमशुदगी लिखाने थाना पहुंचते इसके पहले ही नरबली का भंडाफोड़ हो गया।

ऐसा खुला दूसरा मामला

नागरिकों को शक हुआ कि पूरा मुहल्ला मासूम चिराग को खोज रहा है।और यादव परिवार की गतिविधिया संदिग्ध है। तेज आवाज में डेक बजा रहा है। नागरिकों का शक इसलिए गहरा हुआ कि आरोपी का परिवार पहले नेवईभाठा में रहता था। परिवार की संदिग्ध गतिविधियों के कारण ही नेवईभाठा से उसे भगाया गया था। आठ माह पहले से आकर वह रुआंबाधा में रहने लगा था। इसी बीच नागरिक जब भीतर पहुंचे तो उनका शक यकीन में बदल गया।

मासूम चिराग शव बरामद

घटना की सूचना पुलिस को दी गई और खुदाई कर मासूम चिराग शव बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस के सामने खुलासा किया कि उन्होंने मनीषा नामक बच्ची की भी बलि दी है। मासूम चिराग के शव बरामद करने के बाद पुलिस ने मनीषा का कंकाल बरामद किया था।


खून व मिट्टी से बनाया था ताबीज

मासूम की जिस तरह कत्ल किया गया वह रोंगटे खड़ा कर देने वाला है। अभियुक्तों ने मासूम की बलि देने से पहले काली माता के सामने पूजा पाठ की। इसके बाद ईश्वरी ने धारदार चाकू से मासूम के दोनों गाल को कान तक काटा। फिर जीभ को काटा। इसके बाद ईश्वरी लाल की पत्नी किरण ने उसी चाकू से मासूम का सिर धड़ से अलग कर दिया।

क्रब खोदकर शव को दफना दिया

बलि देते समय शेष पांच अभियुक्तों ने मासूम को पकड़ कर रखा था। बाद में साक्ष्य छिपाने के उद्देशय से आरोपियों ने तांत्रिक के आवास में ही क्रब खोदकर शव को दफना दिया। धन और वैभव प्राप्त करने तांत्रिक ने मासूम के खून को पात्र में एकत्र किया था। बाद में खून व घटना स्थल की मिट्टी का मिश्रण कर ताबीज तैयार किया गया और फिर सभी आरोपियों ने उसे धारण कर लिया था।


दो अलग अलग एफआईआर

मासूम चिराग के मामले में अपहरण और उसकी हत्या करने के मामले में भिलाई नगर पुलिस ने बारह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।मासूम मनीषा सिविल लाइन दुर्ग स्थित खुले मैदान में अपने माता पिता के साथ तंबू में रहती थी। देवार जाति की होने के कारण मनीषा के गायब होने पर परिजनों ने ज्यादा खोजबीन नहीं की। मामला का खुलासा होने पर सिटी कोतवाली में एफआईआर दर्ज किया गया।

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