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बच्चों के बस्ते व पालकों की जेब का वजन कम करने निजी पब्लिशरों की किताबें नहीं चलेंगी

Updated: IST Children bags and reduce weight of the pockets of
महंगी किताबों को खरीदने मजबूर करने वाले स्कूल संचालक अब स्कूल में निजी प्रकाशकों की किताबें नहीं चला सकेंगे।

भिलाई .महंगी किताबों को खरीदने मजबूर करने वाले स्कूल संचालक अब स्कूल में निजी प्रकाशकों की किताबें नहीं चला सकेंगे। सीबीएसई बोर्ड ने एनसीईआरटी की ही किताबें चलाने के आदेश कई वर्षो से दिए हैं,लेकिन इन किताबों को सख्ती से लागू कराने का रास्ता खोज निकाला है। सीबीएसई बोर्ड ने सभी स्कूलों से ऑनलाइन जानकारी मांगी है कि उनकी स्कूल में किस कक्षा में कितने स्टूडेंट्स है। इसके लिए ऑनलाइन प्रक्रिया भी 15 फरवरी से शुरू हो गई है।

22 फरवरी तक सूची भेज सकेंगे

सीबीएसई की वेबसाइट पर स्कूल संचालक 22 फरवरी तक अपने स्कूल की सूची भेज सकेंगे, पर खबर है कि स्कूलों को मिले इस पत्र के बाद कुछ स्कूल संचालकों ने एनसीईआरटी की ही किताबें चलाने का मन बना लिया तो कुछ अभी तैयार नहीं है। स्कूल संचालकों ने यह भी सवाल उठा दिया है कि क्या सत्र शुरू होने से पहले मार्केट में पर्याप्त किताबें आ पाएंगी? अगर नहीं आई तो ऐसी स्थिति में प्राइवेट पब्लिशर की किताबें लागू करना उनकी मजबूरी होगी।

जितनी मांगेंगे उतनी मिलेंगी

बोर्ड ने अप्रेल में शुरू होने वाले सत्र के दो महीने पहले ही किताबों को लेकर कवायद शुरू कर दी है। समय पर किताब उपलब्ध कराने बोर्ड ने सभी स्कूलों से कक्षावार बच्चों की जानकारी मांगी है ताकि समय पर किताबों का प्रकाशन पूरा हो सकें और बाजार में किताबें सही समय पर पहुंच सकें। इस आदेश के बाद कुछ स्कूल संचालकों ने तो घुटने टेक दिए हैं पर कुछ अभी भी जानकारी देने से बच रहे हैं।

होगा बस्ते का बोझ कम

एनसीईआरटी के सिलेबस के अनुसार एक विषय की एक ही किताब होगी जिसके कारण बच्चों के बस्ते का भी वजन कम हो जाएगा। इससे पहले स्कूल प्रबंधन प्राइवेट पब्लिशर की एक ही सब्जेक्ट की कई किताबों लेनी पड़ती थी। पर इस नई व्यवस्था के बाद बच्चों के कंधे और पालकों की जेब पर किताबों का कम वजन पड़ेगा।

नहीं होंगे निर्भर

खुले मार्केट में एनसीईआरटी की किताबें मिलने के बाद अब पालकों को तय दुकान में जाने से भी छुटकारा मिल जाएगा और बिना किसी दबाव के अपनी मर्जी की दुकान से किताब और कॉपियां ले सकेंगे।

यह काम दो महीने पहले

एमजीएम के प्रिंसिपल बीवीके रेड्डी ने कहा कि बोर्ड ने आदेश तो जारी कर दिया पर यह काम दो महीने पहले होना था। अधिकांश स्कूलों ने दिसंबर में ही प्राइवेट पब्लिशर की किताबों को फाइनल कर दिया है, अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बोर्ड 20 दिनों में किताब उपलब्ध करा पाएगा?

आज ही आदेश

प्रिंसिपल श्रीशंकराचार्य विद्यालय राजकुमार शर्मा ने कहा कि हमने आज ही आदेश देखा है जैसे ही ऑनलाइन इंट्री की वैसे ही किताबों का बिल बनकर सामने आने लगा। इससे लग रहा है कि किताबें सीधे स्कूल में ना आ जाएं, क्योंकि कैंपस में हम किताबें नहीं बेच सकते।

कौन सी किताबें सही

श्रीशंकरा स्कूल सेक्टर-10 के चेयरमेन टीआर रामचंद्रन ने कहा कि दो साल पहले ही हमने एनसीईआरटी की किताबें लागू कर दी है। पालक बाजार में कही से भी खरीद सकते हैं। बोर्ड का यह निर्णय अच्छा है, क्योंकि पालक भी जागरूक हैं और वे जानते हैं कि कौन सी किताबें सही हैं।

सख्ती से लागू कराएगा

डीईओ आशुतोष चावरे ने कहा कि अब तक स्कूल संचालक सीबीएसई बोर्ड की सरकारी स्कूलों में ही एनसीईआरटी की किताबें लागू होने की बात कहकर बच जाते थे, लेकिन इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग भी उसे सख्ती से लागू कराएगा। पालकों को इससे काफी राहत मिलेगी।

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