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फोटो दिखाकर बच्ची से पूछा ये अंकल ने किया था बेड टच

Updated: IST Photo showing minor asked these uncle had beds Tou
माइल स्टोन में पढऩे वाली मासूम तो दरिंदे ड्राइवर के अनाचार की शिकार हुई ही, पुलिस की पूछताछ भी परिजन के लिए सजा से कम नहीं रही।

भिलाई. माइल स्टोन में पढऩे वाली मासूम तो दरिंदे ड्राइवर के अनाचार की शिकार हुई ही, पुलिस की पूछताछ भी परिजन के लिए सजा से कम नहीं रही। पुलिस धड़धड़ाते हुए वर्दी में स्कूल पहुंची। बच्ची से पूछताछ कर आरोपी ड्राइवर की शिनाख्त करवाई फिर अपनी ही जीप में बिठाकर थाने ले आई। यहां भी बंद कमरे में महिला पुलिस बच्ची से घंटेभर पूछताछ करती रही। इसके बाद दिनभर मेडिकल के नाम पर थाने से अस्पताल, अस्पताल से थाने घुमाती रही। रात करीब 9 बजे फिर जिला अस्पताल ले गई, लेकिन मेडिकल नहीं हो सका। आखिर में 10 बजे अपनी गाड़ी से बच्ची को घर छोड़ा।

मासूम को पूछताछ करने दूसरे कमरे में ले गई

हंगामे की खबर के मिलते ही स्मृति नगर और सुपेला पुलिस 11.30 बजे माइल स्टोन स्कूल पहुंची। उस समय स्कूल में पीजी-1 से लेकर क्लास-5 तक के लगभग 700 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। चौकी प्रभारी एनके देवांगन जवानों के साथ धड़धड़ाते हुए डायरेक्टर ममता शुक्ला के चेंबर में पहुंचे, जहां पीडि़त मासूम के परिजन पहले से ही मौजूद थे। इसके बाद पुलिस मासूम को पूछताछ करने दूसरे कमरे में ले गई। परिजन और क्लास टीचर भी साथ में थीं। पुलिस बार-बार मासूम से पूछ रही थी कि बेटा जो आपको परेशान कर रहा था उसे पहचानते हो? अपनी क्लास टीचर की गोद में बैठी मासूम कुछ नहीं बोली और मुंह पीछे कर सीने से चिपक गई।

बच्ची को यूरिन नहीं हुई तब पता चला

मंगलवार को स्कूल की छुट्टी होने के बाद बच्ची दोपहर को घर पहुंची। वहां नहाते समय मां ने बच्ची से यूरिन करने कहा। यूरिन नहीं हुई और वह दर्द से रोने लगी। तब मां एक निजी अस्पताल ले गई और मामले का खुलासा हुआ।

तीन बार मेडिकल के लिए

दोपहर 1.20 बजे पीडि़त मासूम व उनके परिजन को वर्दीधारी पुलिस अपनी जीप में बैठाकर सीधे सुपेला थाना ले गई। थाने में एक कमरे में महिला पुलिस मासूम से घंटेभर पूछताछ करती रही। वह भी वर्दी में ही थी। दोपहर करीब 2.25 बजे पुलिस फिर अपनी ही जीप में बैठाकर सुपेला लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले गई। वहां मौजूद डॉक्टर ने कुछ दस्तावेज मांगा, लेकिन पुलिस के पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं था। हॉस्पिटल में 15 मिनट रुके रहे इसके बाद फिर पुलिस मासूम को थाने ले आई।

परिजन मासूम को गोद में लिए थाने पहुंचे

दोपहर 2.45 बजे परिजन मासूम को गोद में लिए थाने में पहुंचे। यहां कागजी खानापूर्ति करने में करीब पौन घंटे लग गए। 3.30 बजे फिर बच्ची को दस्तावेज के साथ मुलाहिजा करवाने के लिए सुपेला हॉस्पिटल लेकर गए। इसके बाद घर छोड़ दिया। रात करीब 8 बजे पुलिस फिर वर्दी में मासूम के घर पहुंची और मेडिकल चेकअप कराने अपने वाहन में जिला अस्पताल ले गई। चूंकि बच्ची ने खाना खा लिया था डॉक्टरों ने मेडिकल जांच नहीं की और गुरुवार की सुबह आने कहकर लौटा दिया। पुलिस रात 10 बजे मासूम को घर छोड़ा।

जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट में यह है प्रावधान

नाबालिग का बयान लेने थाना में बुलाने के बजाए पुलिस खुद उसके घर जाए। पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारी वर्दी में नहीं सिविल ड्रेस में हों। महिला पुलिस या मजिस्ट्रेट लिखेंगे कथन। बयान लिखते समय बच्चा आरोपी के संपर्क में न आए यह सुनिश्चित करना है। रात में बच्चे को थाने में किसी भी कारण से रोका नहीं जा सकता। पुलिस द्वारा बच्चे की पहचान को गोपनीय रखी जाएगी0 बच्चे के माता-पिता या कोई बच्चे की भरोसे वाला व्यक्ति की उपस्थिति जरूरी है। पुलिस 24 घंटे के भीतर न्यायालय एवं बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करे। रिपोर्टर सरल भाषा में लिखी जाए, प्रकरण की सुनवाई बंद कमरे में होना

फोटो दिखाकर करवाई आरोपी की पहचान

इसके बाद पुलिस ने स्कूल के सभी बस चालकों को क्लास रूम के बाहर बुलवाकर कतार से खड़ा कराकर उनकी फोटो खींची। इसके बाद पुलिस ने फोटो क्लास टीचर को देकर मासूम को दिखाकर उस ड्राइवर को पहचानने कहा। बच्ची ने आरोपी ड्राइव के चेहरे पर दो बार हाथ रखकर कहा यही है वो गंदे अंकल।

सीधी बात वीरेंद्र सतपथी, सीएसपी

सवाल :- अनाचार पीडि़त मासूम बच्ची व परिजन को थाने में बुलाकर पुलिस पूछताछ कर सकती है क्या? जवाब :- हां, बिलकुल, महिला अधिकारी हो तो थाने में बुलाकर भी हालात को देखते हुए पूछताछ करने के बाद एफआईआर दर्ज की जा सकती है। सवाल :- पुलिस के वाहन में वर्दीधारी जवान नाबालिग को स्कूल से थाना, थाना से हॉस्पिटल, हॉस्पिटल से फिर थाना व हॉस्पिटल घुमाते रहे, क्या यह उचित है? जवाब :- कोई जवाब नहीं दिया।सवाल :- स्कूल में प्रदर्शन करने वालों को पुलिस ने बलपूर्वक खदेड़ा। जवाब :- हां हालात को देखते हुए स्कूल में प्रदर्शन करने वालों को बलपूर्वक खदेड़ा गया।

बच्चे दो घंटे स्कूल में ही फंसे रहे

घटना को लेकर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी स्कूल के मेन गेट के सामने ही डटे रहे। वे काफी आक्रोशित थे। आरोपी ड्राइवर को अपने हवाले करने की मांग कर रहे थे। तब तक दोपहर के 12.30 बज चुके थे। पीजी-1 व पीजी-2 के बच्चों के छुट्टी का समय हो चुका था, लेकिन बाहर आक्रोशित भीड़ को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने छुट्टी नहीं करने का निर्णय लिया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बस चालकों को भी पुलिस सुरक्षा में स्कूल के भीतर ही रखे हुए थे। इसके बाद प्रबंधन ने पालकों को देरे से छुट्टी होने का मैसेज भेजा। पीजी के बच्चे दो घंटे भीतर ही फंसे रहे। बच्चों को लेने पहुंच रहे पालकों को भीड़ ने रोका-टोका नहीं बल्कि मदद की। इसी सेकंड पॉली के बच्चों की आधा घंटा देर से 3 बजे छुट्टी हुई।

पुलिस ने लहराई लाठी

घटना की खबर मिलते ही दोपहर 12 बजे छात्र संगठन एबीवीपी, एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंच गए थे। भीड़ को देखते ही स्कूल प्रबंधन ने मेन चैनल गेट पर ताला लगा दिया था। तब तक पुलिस भी मौके पर पहुंच चुकी थी। प्रदर्शनकारी चैनल गेट को उखाडऩे का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस हस्तक्षेप से कामयाब नहीं हो सका। लोगों के आक्रोश को देखते हुए अन्य थानों से बल बुलवाया गया। पूछताछ व पहचान के बाद पुलिस आरोपी ड्राइवर को ले गई तक प्रदर्शनकारी स्कूल के सामने डटे रहे। वे स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। समझाइश के बाद भी नहीं माने तो पुलिस ने भीड़ तितर-बितर करने लाठियां लहराई। कुछ युवकोंं को चोट भी लगी।

आरोपी को सजा दिलवाने पूरी मदद करूंगी

स्कूल में 16 कैमरे लगे हैं। पुरूष स्टाफ के प्रवेश पर भी सख्त मनाही है। इसके बावजूद कहां चूक हो गई मैं स्वयं जांच कर रही हंू। सीसीटीवी फूटेज में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। चाहे जो भी हो अपराधी को सजा दिलाने मैं पालक की पूरी मदद करूंगी।

ममता शुक्ला, डायरेक्टर माइल स्टोन स्कूल

वर्दी में पुलिस पूछताछ नहीं कर सकती

माइल स्टोन स्कूल के घटना की सूचना मिली है। सीडब्ल्यूसी के समक्ष पीडि़त नाबालिग को अब तक पेश नहीं किया गया है। नियम से 24 घंटे में पेश कर दिया जाना चाहिए। नाबालिग के साथ अगर पुलिस वर्दी में चल रही थी, तो यह सही नहीं है। इस विषय पर पूछताछ की जाएगी।

सरिता मिश्रा, सदस्य, सीडब्ल्यूसी

शिक्षा विभाग करेगी जांच

शिक्षा विभाग की ओर से जांच की जाएगी। अगर प्रबंधन में खामियां पाई जाएगी तो उस पर कार्रवाई होगी। पूर्व को घटनाओं को देखते हुए पहले ही सभी निजी व सरकारी स्कूल के प्रमुखों को गुड टच व बेड टच के बारे में सतर्क रहने कहा गया है।

आशुतोष चावरे, डीईओ दुर्ग

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