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रेलवे एसपी का खुलासा: हेडमास्टर ने और मासूमों से की थी गंदी हरकत

Updated: IST Railway SP disclosed: The headmaster was filthy ac
एक महीने पहले स्कूल में जो घटना हुई उसमें बच्ची इतनी छोटी है कि उसे न तो विरोध करना आया और ना ही वह अपने पैरेंट्स को बता पाई।

भिलाई. एक महीने पहले स्कूल में जो घटना हुई उसमें बच्ची इतनी छोटी है कि उसे न तो विरोध करना आया और ना ही वह अपने पैरेंट्स को बता पाई। घर के बाद स्कूल बच्चों के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, लेकिन ऐसी घटनाओं ने स्कूल के प्रति भी पालकों में डर बढ़ा दिया है। यहां हुई घटना के लिए पूरा सिस्टम जिम्मेदार है।

हेडमास्टर ने और भी बच्चियों के साथ छेडख़ानी की

यह बातें रेलवे एसपी पारूल माथुर ने पत्रिका से कही। उन्होंने कहा कि उनकी जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि उस आरोपी हेडमास्टर ने और भी बच्चियों के साथ छेडख़ानी की थी, लेकिन उसका स्तर कम था। केन्द्रीय विद्यालय चरोदा पहुंची एसपी पारुल के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेशा चौबे व रक्षा टीम भी मौजूद थे।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अवेयरनेस प्रोग्राम

रेलवे के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अवेयरनेस प्रोग्राम चलाया जाएगा। एसपी ने कहा कि आज केन्द्रीय विद्यालय से इसकी शुरुआत हुई है। इसके बाद उतई के केन्द्रीय विद्यालय और रेलवे के एक और स्कूल के साथ ही रायपुर के स्कूलों में भी यह कार्यक्रम होगा।

फेलियर सिस्टम से नहीं मिली मदद

एसपी पारूल माथुर ने कहा कि स्कूल में जो घटना हुई उसने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। हमारी सोसाइटी और स्कूल प्रबंधन उस बच्ची की सुरक्षा में फेल साबित हुआ। बच्चे सबसे ज्यादा भरोसा अपने टीचर पर करते हैं और जब वे ही उनके साथ ऐसा करें तो वे खुलकर कुछ कह नहीं पाते। उस बच्ची के साथ भी कुछ ऐसा हुआ। अपनी कम समझ और अवेयरनेस की कमी से वह उस हेडमास्टर के शोषण का शिकार होती रही। उन्होंने कहा कि वह इस जागरुकता कार्यक्रम के जरिए उस घटना से संबंधित कुछ तथ्यों को भी समझने यहां पहुंची हैं।

नॉम्र्स में नहीं है कैमरा लगाना

स्कूल में हुई चूक के बारे में एसपी पारूल ने कहा कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने जानकारी ली है। कॉरिडोर और कैंपस में कैमरा लगाया जा सकता है, लेकिन क्लास रूम में कैमरा लगाना सीबीएसई के नॉम्र्स में नहीं है, इसलिए इस पर हम कोई भी निर्देश नहीं दे सकते। लेकिन स्कूल इससे स्कूल अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।

छात्र और छात्राओं को पाक्सो एक्ट की जानकारी दी
बेटियों को अपनी सुरक्षा खुद करने तैयार होना पड़ेगा और बेटों को भी यह समझना होगा कि उनकी बहन, सहपाठी या अन्य किसी महिला के साथ गलत न हो और अगर वो ऐसा होते देखें तो तुरंत उनकी मदद को आगे आएं। ऐसी ही कुछ समझाइश रेलवे पुलिस अधीक्षक पारुल माथूर और एडिशनल एसपी सुरेशा चौबे ने केन्द्रीय विद्यालय के स्टूडेट्स को दी। स्कूल में हुए कार्यक्रम में छात्र और छात्राओं को अलग-अलग पाक्सो एक्ट की जानकारी दी गई। इस अवसर पर बच्चों को गुड टच, बेड टच का मतलब भी समझाया। कार्यक्रम में बाल संरक्षण अधिकारी सुरेन्द्र कौशिक, प्राचार्य वी अरोरा व स्टाफ मौजूद था।

बेटे भी रहें सतर्क

दूसरे सत्र में हुए कार्यक्रम में पहली से बारहवीं तक के छात्रों को शामिल किया गया। अतिथियों ने बताया कि कई बार लड़के भी शारीरिक शोषण का शिकार होते हैं पर वे किसी को बोल नहीं पाते। इसलिए जरूरी है कि वे भी पाक्सों एक्ट की बारीकियों को समझें। रक्षा टीम के सदस्यों ने बताया कि वे हमेशा अलर्ट रहें ताकि अपने आसपास किसी भी बच्ची,सहपाठी या अन्य युवती व महिला के साथ कुछ गलत होता देखें तो तत्काल हेल्पलाइन के नंबर पर फोन कर पुलिस को बताएं या चाइल्ड लाइन को संपर्क करें। ताकि पीडि़त को तत्काल मदद मिल सकें।

बच्चों ने पूछे प्रश्न

इस सेमीनार के दौरान बच्चों ने एक्सपर्ट से प्रश्न भी पूछे जिसमें उन्होंने पाक्सो से संबंधित जानकारी, हेल्पलाइन नंबर भी मांगे। खासकर लड़कों ने पूछा कि अगर कोई उन्हें झूठे आरोप में फंसा दे तो वे क्या करें। इस पर रक्षा टीम ने उनका समाधान कर बताया कि कई बार लड़कियां भी इसका गलत फायदा उठाती है, लेकिन कार्रवाई से पहले पुलिस जांच करती है अगर वह गलत पाई गई तो लड़की पर भी कार्रवाई होती है। छात्राओं ने भी किस तरह मदद मिलेगी और कितना वक्त लगेगा जैसे सवाल किए।

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