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ऐसा बैंक जहां सुबह 4 बजे से लाइन लगाने पर शाम को होता है भुगतान

Updated: IST Such as bank were early in the morning putting lin
जिला सहकारी बैंक के मुख्य दरवाजे पर सुबह 4 बजे से लाइन में लगने के बाद शाम पांच बजे तक किसानों का नंबर आता है। कई बार कैश खत्म हो जाता है।

भिलाई/सेलूद. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक सेलूद में किसानों को धान बिक्री का भुगतान लेने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। बैंक के मुख्य दरवाजे पर सुबह 4 बजे से लाइन में लगने के बाद शाम पांच बजे तक किसानों का नंबर आता है। कई बार सुबह से लाइन लगने के बाद शाम को नंबर आते-आते तक कैश खत्म हो जाता है। ऐसी स्थिति कमोबेश रोज निर्मित हो रही है।

इसलिए हो रही परेशानी

ग्राहकों की संख्या और किसानों की भीड़ को देखते हुए बैंक प्रबंधन द्वारा कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गई है। सेलूद बैंक के तहत छह सहकारी समितियों के 60 गांवों के किसानों के खाते हैं। हजारों किसान ग्राहकों की संख्या वाले बैंक में भुगतान के लिए मात्र एक ही काउंटर की सुविधा है। इसी के चलते हमेशा भीड़ लगी रहती है। नियमानुसार भीड़ को देखते हुए काउंटर की सुविधा बढ़ाना चाहिए। किंतु इस दिशा में न तो किसान संघ और न ही बैंक के उच्च प्रबंधन द्वारा कोई कदम उठाया गया है।

कैश भुगतान के कारण अन्य काम ठप

बताया जाता है कि दिसंबर से लेकर मार्च अंत सिर्फ किसानों का भुगतान किया जाता है। इस दौरान बैंक से संबंधित अन्य काम ठप रहता है। चेक बुक इश्यु, डीडी, बैंक ड्राफ्ट, पास बुक प्रिंट आदि काम ठप है। इस काम के लिए बैंक स्टॅाफ की ओर से साफ मना कर दिया जाता है।

कड़ाके की ठंड में लाइन लगाने की मजबूरी

बैंक के ग्राहक किसानों ने बताया कि कड़ाके की ठंड में सुबह 4 बजे से लाइन लागनी पड़ती है। ठंड को देखते हुए किसान अपने पास बुक बैंक के बरामदे में रखकर रखवाली करते हैं। बैंक खुलने पर कर्मचारी उसे भीतर ले जाते हैं और बारी-बारी से किसानों को भुगतान के बुलाया जाता है। उस दिन किसानों को कोई अन्य काम नहीं हो पाता।

एक सप्ताह का इंतजार

बैंक प्रबंधन की ओर से किसानों को प्रति सप्ताह मात्र 24 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है। अगले भुगतान के लिए एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है। इससे किसानों को मजदूरी सहित थे्रसर, हार्वेस्टर, ट्रैक्टर वालों को पेमेंट करने में दिक्कतें हो रही है।

ओडीएफ गांव में नहीं कैशलेस की सुविधा

केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौचमुक्त गांव तो बन गया है किंतु कैशलेस नहीं हो पाया है। पाटन ब्लॅाक के सबसे बडे एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के इस गांव में साढ़े सात हजार की आबादी में एक भी एटीएम की सुविधा नहीं है। गांव में तीन बैंक हैं तीनों बैंक में ग्राहक मात्र चार हजार ही प्रतिदिन निकाल सकते है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में किसानों को प्रति सप्ताह 24 हजार की सीमा भी बहुत मुश्किल से मिल रही हैं। सैकड़ों दुकानदारों को स्वीप मशीन की सुविधाएं नहीं दी गई है।

किसानों को हो रही परेशानी

सरपंच खेमलाल साहू ने कहा कि सहकारी बैंक में एक ही काउंटर एवं निश्चित राशि भुगतान होने के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। किसानों की भीड़ को देखते हुए बैंक प्रबंधन को काउंटर की संख्या बढ़ाना चाहिए।

काम निर्धारित समय तक

बैंक मैनेजर एसपी महार ने कहा कि बैंक का काम निर्धारित समय तक होता है। अभी धान बिक्री का सीजन होने के कारण किसानों की भीड़ लगी रहती है। किसान अपनी मर्जी से सुबह से ही आ जाते हैं। बैंक में भुगतान के अलावा अन्य सभी बैंकिंग काम भी हो रहे हैं। जरुरत पडऩे पर काउंटर की सुविधा भी बढ़ाते हैं।

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