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4 साल में 4 बार टेंडर नहीं बदले जर्जर पाइप, 15 हजार लोग पी रहे गंदा पानी

Updated: IST 4 times in 4 years instead shabby pipe tender, 15
शहर के अधिकतर क्षेत्र में सीमेंट की पाइप लाइन बिछाई गई थी। इनमें से अधिकतर पाइप लाइन अब जर्जर होकर टूट गई है। पाइप लाइन में लिकेज व घरों में गंदा पानी पहुंचने की शिकायत लोग रोज कर रहे हैं।

दुर्ग.दो वार्ड में जर्जर पाइप लाइन चार साल बाद भी नहीं बदली जा सकी। इस दरम्यान निगन प्रशासन ने चार बार टेंडर निकाले। हालय यह है कि पद्मनाभपुर क्षेत्र के करीब 15 हजार की आबादी को गंदा पानी पीना पड़ रहा है। गंभीर बात यह है कि पर्याप्त पाइप नहीं होने के बाद भी निगम ने ठेकेदार को वर्क आर्डर जारी कर दिया। इस कारण चौथी बार टेंडर के बाद काम तो शुरू किया गया लेकिन वह भी अब अटक गया है। वर्ष 1984 में निगम क्षेत्र में पेयजल योजना की शुरूआत की गई। शहर के अधिकतर क्षेत्र में सीमेंट की पाइप लाइन बिछाई गई थी। इनमें से अधिकतर पाइप लाइन अब जर्जर होकर टूट गई है। पाइप लाइन में लिकेज व घरों में गंदा पानी पहुंचने की शिकायत लोग रोज कर रहे हैं।

लोग रोज कर रहे शिकायत

पद्मनाभपुर के वार्ड 45 व 46 में भी इसी दौरान पाइप लाइन बिछाई गई थी। यहां की भी पाइप लाइन बेहद जर्जर हो गई है। चार साल पहले वर्ष 2013 में पाइप लाइन को बदलने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन पाइप लाइन अब तक बदली नहीं जा सकी है। पाइप लाइन बदलने में देरी से नाराज विधायक अरुण वोरा कांग्रेसी पार्षदों के साथ निगम कार्यालय का घेराव भी कर चुके हैं। विरोध में विधायक व कांग्रेसी पार्षद करीब सात घंटे तक निगम कार्यालय के पोर्च पर जमीन पर बैठे रहे। बाद में आयुक्त ने मौके पर पहुंचकर विधायक को काम जल्द शुरू कराने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद कलक्टर ने भी क्षेत्र का मुआयना किया था।

95.60 लाख से बदला जाना दो वार्डों की पाइप लाइन

पद्मनाभपुर क्षेत्र की पाइप लाइन बदलने के लिए 95.60 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई है। इसमें पाइप की कीमत के साथ ठेकेदार की लागत शामिल है। ठेकेदार द्वारा पुरानी पाइप निकालकर उसकी जगह 80 व 100 एमएम डाया की पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसके अलावा वाल्व व चेम्बर भी बदलना भी प्रस्तावित है। निगम प्रशासन द्वारा पर्याप्त पाइप की व्यवस्था किए बिना ही ठेकेदार को वर्क आर्डर जारी कर दिए जाने के कारण यह स्थिति बन रही है। इस कारण कुछ इलाकों में पाइप बदलने के बाद काम ठप्प हो गया है। अब निगम प्रशासन द्वारा पाइप मंगाने की जुगत की जा रही है, लेकिन एक्साइज छूट संबंधी प्रमाण पत्र की औपचारिकता में देरी के कारण खरीदी आगे नहीं बढ़ रही है।

हर साल पीलिया से मौत फिर भी

जर्जर पाइप लाइन से प्रदूषित जलापूर्ति के कारण शहर में हर साल पीलिया से मौत के मामले सामने आते हैं। वर्ष 2014 में प्रदूषित पानी पीने से पीलिया व जलजनित रोगों के कारण आपापुरा, शिवपारा, डिपरापारा सहित अन्य क्षेत्रों में 11 लोगों की मौत हुई थी। पिछले साल इन क्षेत्रों के अलावा पद्मनाभपुर में भी पीलिया फैली थी। चौथी बार टेंडर और वर्क आर्डर के बाद जून में महापौर चंद्रिका चंद्राकर ने पाइप लाइन बदलने के काम का भूमिपूजन किया था। मुश्किल से महीनेभर काम चला। बमुश्किल 10 फीसदी पाइप लाइन ही बदला जा सका। इसके बाद से काम बंद है। निगम के अधिकारी काम में देरी के लिए कागजी प्रक्रिया को कारण बता रहे हैं

कब टेंडर हुआ आप भी जान लें कब कब हुआ टेंडर व क्या हस्र

पहली बार - 5 अप्रैल 2013 को - लिपिकीय त्रुटि का कारण निरस्त

दूसरी बार - 24 जून 2013 - ठेकेदार ने काम करने से मना कर दिया। कहा विलंब के कारण पाइप की कीमत बढ़ गई है।

तीसरी बार - 25 जुलाई 2013 - ठेकेदार का एसओआर 145 फीसदी, निगम ने टेंडर निरस्त किया।

चौथी बार - 22 मई 2015 - चौधरी एग्रोटेक का टेंडर स्वीकृत, 31 मार्च को वर्क आर्डर जारी

छूट संबंधित प्रक्रिया की जा रही

प्रभारी अधिकारी दुर्ग निगम आरके जैन ने बताया कि पाइप लाइन बदलने का काम शुरू किया गया था। पुराने स्टाक से कुछ पाइप लाइन बदले भी गए हैं। नई पाइप की खरीदी के लिए एक्साइज छूट संबंधी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके लिए दस्तावेज जिला प्रशासन को भेजा गया है।इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रमाण पत्र मिलते ही पाइप खरीदकर काम शुरू कराया जाएगा।

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