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नवजात के हत्यारे मां-बाप सहित नानी को उम्रकैद

Updated: IST Newborn killer accuesd parents Including grand mot
चार दिन की नवजात कन्या की हत्या के मामले में पंचम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीलिमा बघेल के न्यायालय में फैसला सुनाया गया।

दुर्ग.चार दिन की नवजात कन्या की हत्या के मामले में पंचम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीलिमा बघेल के न्यायालय में फैसला सुनाया गया। न्यायालय ने कन्या की मां बालाजी नगर खुर्सीपार निवासी सुजाता 20 साल, पति धीरज 22 साल और उसकी नानी धरमजीत पति वॉशलोशन चौधरी 40 साल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। नवजात को खुले स्थान में फेंकने पर दो वर्ष और साक्ष्य छुपाने के लिए भी तीन साल कारावास से दंडित किया। न्यायालय ने तीनों पर एक-एक हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।

शिशु के सिर पर चोट के निशान

प्रकरण के मुताबिक खुर्सीपार पुलिस ने बालाजी मंदिर के निकट 30 अगस्त 2015 को नवजात कन्या का शव बरामद किया था। शव मंदिर के निकट से बहने वाले नाले में पड़ा था। नाले के अंदर लगे पाइप में नवजात का शव फंसा हुआ था। शिशु के सिर पर चोट के निशान थे। पुलिस ने इस मामले में पहले मर्ग कायम कर नवजात को खुले स्थान में फेकने के मामले में जुर्म दर्ज कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर एफआईआर में हत्या की धारा जोड़ी गई। जांच के दौरान पुलिस ने इस गुत्थी को सुलझाकर पहले सुजाता व उसके पति धीरज को और बाद में सहयोग करने वाली धरमजीत को गिरफ्तार किया।

पुलिस ऐसे पहुंची आरोपी तक

मृतक बेबी के पैर में सीएम क ॉलेज का टैग लगा हुआ था। जिसमें प्रसव का दिनांक और मां का नाम सुजाता पति धीरज लिखा हुआ था। पुलिस ने पहले सीएम कॉलेज मचांदुर से जानकारी एकत्र की। इसके बाद बालाजी नगर खुर्सीपार पहुंचकर आरोपियों से पूछताछ की। पूछताछ में मामले का खुलासा हुआ।

रास्ते में उतर गया था आरोपी

बच्ची जन्म से कमजोर थी। वजन कम होने के कारण उसे हायर सेंटर रेफर किया गया था। एंबुलेंस से रायपुर जाते समय आरोपी आधे बीच में ही उतर गयी। तीनों ने मिलकर पहले नवजात के सिर पर वार किया। इसके बाद शव को नाले में बहा दिया। शव बहा नहीं बल्कि पाइप में फंस गया।

पोस्टमार्टम में हुआ खुलासा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जब शव को फेका गया तब मासूम की मौत हो चुकी थी। मासूम की मौत किसी बीमारी से नहीं सिर पर आए चोट की वजह से हुई है। चोट किसी ठोस वस्तु के प्रहार से आया है।

सजा सुनते ही रो पड़े आरोपी

न्यायाधीश नीलिमा बघेल ने जैसे ही आरोपियों को सजा सुनाई आरोपी न्यायालय में ही रोने लगे। इसे देख न्यायाधीश ने अभिरक्षा ड्यूटी करने वाले महिला व पुरुष आरक्षक को आरोपियों को बाहर लेजाने के निर्देश दिए। अधिवक्ता ने भी अभियुक्तों को समझाया कि यह अंतिम फैसला नहीं है। वे हाईकोर्ट जा सकते हैं। इसके बाद जेल दाखिले की प्रक्रिया पूरी की गई।

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