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बिना कार्रवाई अफसरों ने सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त करने की झूठी रिपोर्ट शासन को भेजी

Updated: IST Without action, officials occupying government lan
स्थिति यह है कि शहर के आउटर इलाकों से लेकर गांवों के चारागाह और निस्तारी की जमीन पर भी खुलेआम अवैध कब्जे किए जा रहे हैं।

दुर्ग.ये दो उदाहरण समझने के लिए काफी है कि सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा हटाने के मामले में अफसर उदासीन ही नहीं बल्कि शासन को गलत जानकारी भेज कर गुमराह कर रहे हैं। जबकि सरकारी जमीन को बेजा कब्जा से मुक्त करने का आदेश देश के सर्वोच्च न्यायालय का है। जिला प्रशासन के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये का बेजा फायदा अवैध कब्जा कर सरकारी जमीन हथियाने वाले उठा रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर के आउटर इलाकों से लेकर गांवों के चारागाह और निस्तारी की जमीन पर भी खुलेआम अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। हर माह औसत 150 अवैध कब्जे की शिकायत पहुंचती है, लेकिन सीधी कार्रवाई एक चौथाई में भी नहीं हो पाती।

जुनवानी-खम्हरिया में 25 एकड़ में कब्जा

जुनवानी व खम्हरिया के बीच करीब 25 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया गया है। कई निर्माण पिछले कुछ महीनों में हुए हैं। जुनवानी व खपरी के बीच सरकारी जमीन का भी यही हाल है। शिकायत का भी कोई नतीजा नहीं निकला। मरोदा व नेवई में छह माह में अतिक्रमणकारियों की पूरी बस्ती बस गई है। इसी तरह नेवई में भी बांध के किनारे सुरक्षित क्षेत्र में अवैध निर्माण किए गए हैं। अंजोरा के किसान रामसहाय ने राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे खुद की जमीन खसरा क्रमांक 6 39/1 के आसपास आधा दर्जन से अधिक अवैध कब्जों को लेकर सुराज अभियान में शिकायत की थी। प्रशासन के अफसरों ने रामसहाय के आवेदन आवेदन क्रमांक 1210010006 0030009 को रिकार्ड में निराकृत बता रहा है।

नहीं की गई कार्रवाई

अफसर किसान की शिकायत पर कार्रवाई कर कब्जा हटाना बता रहे हैं। हकीकत यह है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ही नहीं की गई। किसान के मुताबिक कब्जे अब तक नहीं हटाए गए हैं। पाटन के ग्राम तर्रीघाट के ग्रामीणों ने खेल मैदान के लिए आरक्षित शासकीय जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत की थी। ग्रामीणों के आवेदन क्रमांक 12100403711150018 पर भी अफसरों बेदखली की कार्रवाई नहीं की बल्कि अतिक्रमण हटाने का अधिकार पंचायत को होने का हवाला देकर आवेदन निराकृत बता दिया। जबकि शिकायत करने वालों में ग्रामीणों के साथ पंचायत के प्रतिनिधि भी थे। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन की मदद सी ही बेजा कब्जा हटा पाना संभव होगा। अफसरों ने अपना पल्ला ही झाड़ लिया।

खाली जमीन अवैध कब्जाधारियों के निशाने पर

शहर के आउटर इलाकों में खाली जमीन अवैधकब्जाधारियों के निशाने पर है। यहां खुलेआम अवैध कब्जा कर निर्माण किए जा रहें हैं। नेवई व मरोदा के अलावा रिसाली, डुंडेरा, पुरैना, जुनवानी, खम्हरिया, कोहका, कुटेलाभाठा, खुर्सीपार, फोरलेन और रेलवे लाइन के किनार में अवैधकब्जे हो रहे है। जिम्मेदार अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।ग्रामीण क्षेत्र में अवैधकब्जाधारियों ने चारागाह की जमीन को भी नहीं छोड़ रहे हंै। रसमड़ा में चारागाह के अलावा शासकीय अस्पताल परिसर में भी कब्जा कर लिया गया है। बोड़ेगांव, असरनारा, ननक_ी, पतोरा, ढौर, नगपुरा में भी चारागाह की जमीन पर कब्जे की शिकायत ग्रामीणों ने जनदर्शन में की है।

पंचायत के प्रस्ताव के बाद भी नहीं हटे कब्जे

ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर त्वरित कब्जा हटाए जाने का प्रावधान है। लेकिन पुरई, अरसनारा, दनिया, धनोरा, समोदा, बागडूमर, ननकट्टी, बोड़ेगांव, लिटिया, निकुम, अंडा, नगपुरा, चंदखुरी, रसमड़ा में प्रस्ताव के बाद भी कब्जे नहीं हटे। कुछ जगह पहले अभियान चलाया गया था। एसडीएम एके बाजपेयी ने बतााय कि अतिक्रमण को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। अतिक्रमण के मामलों में पंचायतों के प्रस्ताव पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। पूर्वमें बड़ी संख्या में अतिक्रमणकारियों को बेदखल भी किया गया है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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