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सरकार की संशोधित भवन संहिता पेश, सुरक्षा के लिए अब बिल्डर होंगे जिम्मेदार 

Updated: IST Apartments
केंद्र ने नई राष्ट्रीयभवन संहिता का प्रस्ताव किया है, जिसे राज्यों को अपनाना होगा। इसके तहत इमारत के ढांचे की सुरक्षा के लिए बिल्डर जिम्मेदारहोंगे। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने बुधवार को संशोधित संहिता को पेश किया। इस संहिता को उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने तैयार किया है।

नई दिल्ली. केंद्र ने नई राष्ट्रीयभवन संहिता का प्रस्ताव किया है, जिसे राज्यों को अपनाना होगा। इसके तहत इमारत के ढांचे की सुरक्षा के लिए बिल्डरजिम्मेदारहोंगे। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने बुधवार को संशोधित संहिता को पेश किया। इस संहिता को उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने तैयार किया है। हालांकि, यह संहिता स्वैच्छिक प्रकृति की है, लेकिन राज्य इसे अपने भवन उपनियमों में शामिल कर सकते हैं।

नवोन्मेषी सामग्री तथा प्रौद्योगिकियों को लेकर नए प्रावधान

पासवान ने विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के मौके पर इस संहिता को जारी करते हुए कहा कि संहिता में नई और नवोन्मेषी सामग्री तथा प्रौद्योगिकियों को लेकर प्रावधान हैं। साथ ही इसमें प्री फैब्रिकेटेड निर्माण तकनीकों के प्रावधान हैं, जिससे तेजी से निर्माण कर 2022 तक सभी के लिए घर के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। बीआईएस के निदेशक (सिविल इंजीनियरिंग) संजय पंत ने कहा कि यह काफी पृष्ठों वाली संहिता है। इसमें 34 अध्याय हैं। इसका इस्तेमाल स्थानीय निकाय भवन उपनियम बनाने के लिए करेंगे।

बिल्डर भी ढांचे की सुरक्षा के लिएजिम्मेदारहोंगे

सरकारी विभागों द्वारा इसका इस्तेमाल निर्माण गतिविधियों में किया जाता है। इसका इस्तेमाल निजी बिल्डरों, आर्किटेक्ट, प्लानर्स और इंजीनियर जैसे पेशेवरों द्वारा किया जाता है। इसका इस्तेमाल अकादमिक उद्देश्य से भी होता है। भवन संहिता में प्रमुख बदलावों के बारे में उन्होंने कहा कि अभी तक ढांचे की सुरक्षा के लिए डिजाइनरों और निरीक्षकों को हीजिम्मेदारमाना जाता था। इसमें जियो तकनीकी इंजीनियरों और बिल्डरों कीजिम्मेदारनहीं होती थी। अब बिल्डर भी ढांचे की सुरक्षा के लिएजिम्मेदारहोंगे। बिल्डरों को यह प्रमाणपत्र देना होगा कि संबंधित भवन का निर्माण स्थानीय निकायों को जमा कराए गए डिजाइन के अनुरूप किया गया है।

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