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विपरीत परिस्थितियों में 24 घंटे काम करते हैं वनरक्षक, वेतन बस नाममात्र

Updated: IST forest guard recruitment 2016
वन कर्मचारियों को अब भी 24 घंटे सेवाएं प्रदान करनी पड़ रही है। जबकि उनकी तुलना में वेतन बहुत कम है...

छिंदवाड़ा। रविवार को छह जिलों के कर्मचारियों का सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसे संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ के प्रांत अध्यक्ष निर्मल तिवारी ने वनरक्षकों की व्यथा प्रकट की। उन्होंने कहा कि वन कर्मचारी प्राकृतिक संसाधन, वन तथा वन्यप्राणियों की सुरक्षा में 24 घंटे कर्तव्यरत रहता है।

कहा कि हाईकोर्ट जबलपुर के एक निर्णय में पुलिस कर्मचारियों को 12 घंटे से अधिक कार्य नहीं लेने का आदेश पारित है। उसके बाद उनसे 12 घंटे से अधिक कार्य नहीं लिया जा सकता है। वन कर्मचारियों को अब भी 24 घंटे सेवाएं प्रदान करनी पड़ रही है। जबकि उनकी तुलना में वेतन बहुत कम है।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि विधायक चौधरी चंद्रभान सिंह ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में कार्य करने वाले वनरक्षक के उपर ही वन के सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी होती है। उनको यदि कोई समस्या है तो उससे शासन को अवगत कराया जाएगा।

सीसीएफ यूके सुबुद्धि ने कहा कि नियम के अनुसार कार्य किए जाते हैं। यदि कहीं किसी को इस दौरान कोई समस्या है तो वह इसकी जानकारी दें। समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके पूर्व संघ के ने विधायक को अपनी मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपा। अतिथियों के साथ ही विशिष्ट कार्य व सेवानिवृत्त के लिए सदस्यों को सम्मानित किया गया। सम्मेलन में तीनों वनमंडल के डीएफओ, सिवनी, बालाघाट, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, बैतूल व छिंदवाड़ा के वन कर्मचारी शामिल हुए।

महिला प्रकोष्ठ की प्रांत अध्यक्ष माल्ती सिंगारे, प्रांतीय सचिव लालजी उइके, मोहन पांडेय, वैदही शरण मिश्रा, कृपाशंकर सूर्यवंशी, किशोर साहू, अनंतराम विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे।

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