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अफसरशाही ने सीएम के आदेश हवा में उड़ाए

Updated: IST  Indian bureaucracy
मुख्य सचिव ने छह माह बाद फिर से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट, अब सीएम के प्रधान सचिव को भेजनी होगी प्रति

चंडीगढ़। हरियाणा में अफसरशाही द्वारा सरकार के आदेशों को हवा में उड़ाए जाने का एक ताजा मामला सामने आया है। छह माह पहले मुख्यमंत्री द्वारा जारी किए गए आदेशों को अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। मामला सरकारी विभागों में ग्रुप सी व डी श्रेणी में कर्मचारियों की भर्ती का है। अब मुख्य सचिव ने सभी विभागीय अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। विभागाध्यक्षों को यह रिपोर्ट पांच दिसंबर तक दाखिल करने के लिए बाध्य किया गया है।

हरियाणा के सरकारी विभागों में दर्जा तीन व चार के तहत कर्मचारियों की भर्ती का विवाद लंबे समय से चल रहा है। इस मामले को लेकर हरियाणा सरकार व कर्मचारी संगठन कई बार आमने-सामने हो चुके हैं। सत्ता में आने के बाद इन भर्तियों को लेकर नीति बना चुकी है लेकिन वह कभी सिरे नहीं चढ़ी है।

सूत्रों की मानें तो हरियाणा के सभी विभागों में इस समय ग्रुप सी व डी के तहत करीब दो लाख पद रिक्त पड़े हुए हैं।कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि हरियाणा में जनसंख्या वृद्धि के अनुसार सरकारी विभागों में पद बढऩे की बजाए घटते रहे हैं।

वर्तमान में ग्रुप सी व डी के तहत विभिन्न विभागों में करीब 75 हजार कर्मचारी अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं। जिनमें मुख्य रूप से करीब 15 हजार अध्यापक, 12 हजार बिजली कर्मचारी, 12 हजार स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारी तैनात हैं। कर्मचारी संगठन नियमित भर्तियों के साथ-साथ पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने तथा समान काम-समान वेतन का फार्मूला लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस विवाद के चलते पिछले दो वर्ष से सरकारी विभागों में भर्तियों की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई थी।

मुख्यमंत्री ने जून माह के दौरान सभी विभागीय अधिकारियों को ग्रुप सी व डी में आउटसोर्सिंग के तहत भर्तियां करने के लिए कहा था। जून माह के दौरान सभी अधिकारियों को इस संबंध में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। करीब छह माह बीतने पर भी किसी भी अधिकारी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिणाम स्वरूप कई विभागों में यह प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

मुख्य सचिव कार्यालय की तरफ से जारी किए गए आदेशों में सभी विभागाध्यक्षों को 30 नवंबर 2016 तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। यही नहीं सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह इस रिपोर्ट की एक कॉपी सीधे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भी भेजेंगे। सभी अधिकारियों को यह रिपोर्ट पांच दिसंबर तक जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।

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