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महाशिवरात्रि पर इस तरह करें भोलेनाथ की चारों प्रहर पूजा

Updated: IST
भगवान शिव फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी को आधी रात में शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे

महाशिवरात्रि के दिन लोग व्रत, पूजा और रात्रि जागरण करते हैं। इस दिन भोलेनाथ की चारों प्रहरों में पूजा की जाती है। प्रथम प्रहर में संकल्प लेकर दूध से स्नान तथा "ॐ ह्वीं ईशानाय नम:" मंत्र का जप करें। द्वितीय प्रहर में दही स्नान कराकर "ॐ ह्वीं अघोराय नम:" का जप करें। तृतीय प्रहर में घी स्नान एवं "ॐ ह्वीं वामदेवाय नम:" और चतुर्थ प्रहर में शहद स्नान एवं "ॐ ह्वीं सद्योजाताय नम:" मंत्र का जाप करें।

रात्रि के चारों प्रहरों में भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने से जागरण, पूजा और उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो जाता है। इस दिन प्रात: से प्रारंभ कर संपूर्ण रात्रि शिव महिमा का गुणगान करें और बिल्व पत्रों से पूजा अर्चना करें। रूद्राष्टाध्यायी पाठ, महामृत्युंजय जप, शिव पंचाक्षर मंत्र आदि के जप करने का विशेष महत्व है। शिवार्चन में शिव महिम्न स्तोत्र, शिव तांडव स्तोत्र, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिव मानस पूजा स्तोत्र, शिवनामावल्याष्टक स्तोत्र, दारिद्रय दहन स्तोत्र आदि के पाठ करने का महत्व है।

महाशिवरात्रि महिमा

पुराणों में वर्णित कथाओं में महाशिवरात्रि के महत्व को बताते हुए कहा गया है कि फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी भगवान शिव को अत्यन्त प्रिय है। भगवान शिव फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी को आधी रात में शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इस रात्रि को महाशिवरात्रि कहा गया है। अर्धरात्रि में प्रकट होने के कारण जिस दिन अर्धरात्रि में चतुर्दशी तिथि रहती है, उस दिन महाशिवरात्रि व्रत रखा जाता है।

इसी दिन से महाशक्ति पार्वती द्वारा मानव सृष्टि के लिए द्वार खोले गए। शिवजी ने इसी दिन ब्रह्मा के रूप से रूद्र के रूप में अवतार लिया था। जिस महाशिवरात्रि के दिन प्रदोष हो तथा अर्धरात्रि में चतुर्दशी हो उस शिवरात्रि को बहुत ही पुण्य देने वाली कहा गया है। 17 फरवरी को अर्धरात्रि व्यापिनी चतुर्दशी तिथि है। शिवरात्रि पर अनेक ग्रन्थों में अनेक प्रकार से शिव आराधना और अनुष्ठान करने का वर्णन है।

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