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बैंकों पर बोझ बने जनधन खाते, एसबीआई ने खर्च किए 775 करोड़

Updated: IST Jandhan
राज्यसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जनधन खातों के ऑपरेशन में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 774 करोड़ 86 लाख रुपए खर्च किए हैं...

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए बैंक खातों ने बैंकों का बोझ और बढ़ा दिया है। पहले ही एनपीए से जूझ रहे बैंकों के लिए यह योजना अतिरिक्त भार का कारण बन गए हैं। राज्यसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जनधन खातों के ऑपरेशन में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 774 करोड़ 86 लाख रुपए खर्च किए हैं।

गंगवार ने दी जानकारी

वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया कि प्रधानमंत्री जन धन खातों (पीएमजेडीवाई) कुल ऑपरेशनल कॉस्ट की लागत के बारे में वर्ष वार और बैंक वार सूचना नहीं रखी जाती है। हालांकि एसबीआई की ओर से 31 दिसंबर 2016 की स्थिति के बारे में दी गई सूचना के अनुसार जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के परिचालन की उसकी कुल लागत 774.86 करोड़ रुपए है।

जनधन का हिसाब-किताब

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 9 नवंबर 2016 की स्थिति के अनुसार जीरो बैलेंस वाले जन धन खातों की संख्या 5.93 करोड़ थी और 28 दिसंबर 2016 को यह संख्या 6.32 करोड़ थी। उन्होंने कहा, 'जनधन योजना में 9 नवंबर 2016 की स्थिति के अनुसार पीएमजेडीवाई में जमा शेष की मात्रा 45,636 करोड़ रुपए थी, जो 28 दिसंबर 2016 को 71,036 करोड़ रुपए थी।

बैन कर दिए गए 92 लाख खाते

गंगवार ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों, ग्रामीण बैंकों और 13 निजी बैंकों ने सूचना दी है कि 24 मार्च 2017 तक की स्थिति के अनुसार पिछले एक वर्ष में लेन देन न होने के कारण पीएमजेडीवाई के तहत 92,52,609 खातों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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