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ऊर्जित पटेल ने बढ़ाई रिवर्स रेपो रेट, महंगाई बढ़ने के आसार

Updated: IST Urjit Patel raises the revised repo rate, inflatio
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने गुरुवार को नए कारोबारी साल पहली मौद्रिक समीक्षा नीति पेश की। RBIने रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं करते हुए 6.25त्न पर बरकरार रखा।वहीं रिवर्स रेपो रेट में 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने गुरुवार को नए कारोबारी साल पहली मौद्रिक समीक्षा नीति पेश की। RBIने रिवर्स रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6 प्रतिशत की है। वहीं आरबीआई ने रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं करते हुए 6.25% पर बरकरार रखा। यह लगातार तीसरी बार है जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लेंडिंग रेट में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया है।

दो दिनों तक मौद्रिकी नीति की समीक्षा
दो दिन चलने वाली समिति की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक बुधवार से शुरू हो गई थी। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने 8 फरवरी को पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर को 6.25 फीसदी पर बरकरार रखा था।

जीएसटी पास होने से महंगाई बढ़ने की आशंका
वहीं, आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2017-18 की पहली छमाही में मुद्रास्फीति का अनुमान 4.1 प्रतिशत और दूसरी छमाही में 5.0 प्रतिशत रखा है। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया। आरबीआई ने कहा है कि 2016-17 में आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रह सकती है। आरबीआई का कहना है कि वृहत आर्थिक परिदृश्य में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। मुद्रास्फीति के रूख को लेकर जोखिम दोनों तरफ से बराबर-बराबर है। आरबीआई ने यह भी कहा गया कि मानूसन को लेकर अनिश्चितता से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है। वहीं वस्तु एवं सेवा कर के असर से भी एकबारगी मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा है। रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6 प्रतिशत की।

RBI ने रेपो-रिवर्स रेपो के बीच फासला कम किया
बैंकिंग तंत्र में नकदी की बाढ़ के कारण रिजर्व बैंक ने रेपो और रिवर्स रेपो के बीच का फासला कम किया गया। सीमांत स्थायी सुविधा और बैंक दर को बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत किया गया।

क्या है रेपो रेट?
दरअसल, बैंकों को अपने प्रतिदिन के कामकाज लिए अक्सर बड़ी रकम की जरूरत होती है। तब बैंक केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज लेने का विकल्प अपनाते हैं. इस कर्ज पर रिजर्व बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है, उसे रेपो रेट कहा जाता है। रेपो रेट कम होने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और इसके चलते बैंक आम लोगों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों में भी कमी करते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम कर्ज के तौर पर दी जा सके।
क्या है रिवर्स रेपोरेट?
वहीं रिवर्स रेपो रेट वह होता है कि बैंकों के पास दिन भर के कामकाज के बाद बहुत बार एक बड़ी रकम शेष बच जाती है. बैंक वह रकम रिजर्व बैंक में रख सकते हैं, जिस पर उन्हें आरबीआई से ब्याज भी मिलता है. जिस दर पर यह ब्याज उन्हें मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। वैसे कई बार रिजर्व बैंक को लगता है कि बाजार में बहुत ज्यादा नकदी हो गई है तब वह रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी कर देता है। इससे होता यह है कि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपना पैसा रिजर्व बैंक के पास रखने लगते हैं।

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