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आमदनी और खर्चों का ऐसे करें प्रबंधन, हो जाएंगे वित्तीय रूप से मजबूत

Updated: IST financial planning
पैसे कमाने के बाद किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें जिससे वित्तीय मजबूती आए। यह समस्या आज के समय में ज्यादातर लोगों की है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान है तो आपको अपनी आमदनी और खर्च को संतुलित करने की जरूरत है। आज हम आपको बजट बनाने का तरीका बता रहे हैं जिससे पैसे की किल्लत खत्म हो जाएगी और आप अपने भविष्य को भी सुरक्षित बना पाएंगे।

नई दिल्ली। पैसे कमाने के बाद किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें जिससे वित्तीय मजबूती आए। यह समस्या आज के समय में ज्यादातर लोगों की है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान है तो आपको अपनी आमदनी और खर्च को संतुलित करने की जरूरत है। आज हम आपको बजट बनाने का तरीका बता रहे हैं जिससे पैसे की किल्लत खत्म हो जाएगी और आप अपने भविष्य को भी सुरक्षित बना पाएंगे।

खर्च कम करें
आमदनी और खर्चों के बीच संतुलन बैठाने के लिए सबसे पहले खर्चों की लिमिट तय कर लें। इसके लिए घर का बजट बनाते समय खर्च का ब्योरा टेक होम सैलरी पर बनाएं। सही बजट बनाने के लिए तीन-चार महीनों के खर्चों को लिखें और उसको रिव्यू करें। ऐसे करने से आपको पता चल जाएगा की आप कहां फिजूलखर्ची करते हैं। फिर आप उसको कंट्रोल कर पाएंगे।

आय मे बचत का भाग

फाइनेंशियल एक्सपर्ट के मुताबिक भविष्य में आनी वाली जरूरतों को पूरा करने के लिए मंथली इनकम में से 15 फीसदी बचत करें। सैलरी-पेशा वाले लोगों के पास आय का 3 से 9 गुना बचत होनी चाहिए। अगर, आप अपने परिवार में एक मात्र कमाऊ सदस्‍य हैं तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि आप अपने इनकम में से सेविंग करें ताकि आकस्मिक खर्चों आने पर आप उसका वहन कर सकें।

किराये पर 25 से 33 फीसदी

जिन्दगी के बड़े खर्चों में घर का किराया या ईएमआई भी शामिल हैं। अगर, आप वेतन पाने वाले व्यक्ति हैं तो आपको फाइनेंशियल प्‍लानिंग करते समय अपने इनकम का 25 से 33 फीसदी राशि आवंटित करनी चाहिए। अगर, आप इससे अधिक इस मद में खर्च कर रहे हैं तो यह आपके बजट को गड़बड़ कर सकता है, क्‍योंकि पहले ही आप अपने इनकम का एक तिहाई खर्च कर रहे हैं। इसलिए कोशिश करें कि आप अपने इनकम का 25 फीसदी तक ही हाउसिंग पर खर्च हो।

खाने पर 15 से 25 फीसदी

हाउसिंग के बाद दूसरा बड़ा खर्च खाने पर आता है। महीने में खाने का बजट आपकी सैलरी का 15 से 25 फीसदी के बीच होना चाहिए। अगर, आपका खर्च इस मद में अधिक है तो आप अपने खर्च को ट्रैक करें। यह देखें कि महीने में आप कितनी बार रेस्टोरेंट में या बाहर खाना खाते हैं। फिर इस खर्च को कम करें और इसको 15 से 25 फीसदी के बीच में लाएं।

यूटिलिटी बिल पर 10 से 15 फीसदी
यूटिलिटी बिल में बिजली बिल, पानी बिल, मोबाइल बिल, केबल बिल और दूसरे छोटे-मोटे बिल होते हैं। यह वह एरिया है, जहां पर आप थोड़ा सा ऐहतियात बरत कर खर्चे को कम कर सकते हैं। मोबाइल से बातें कम कर, इंटरनेट का यूज कम कर और एसी का उपयोग कम कर यूटिलिटी बिल को कम कर पैसा बचा सकते हैं।

यातायात पर 10 से 15 फीसदी

अगर आप महानगर में रह रहे हैं तो अमूमन आपको यातायात पर ज्‍यादा खर्च करना पड़ता होगा। इसके लिए आपने अगर बजट नहीं बनाया तो बना लीजिए। आपको यातायात पर इनकम का 10 से 15 फीसदी ही खर्च करना चाहिए। अगर, आप अधिक खर्च कर रहे हैं तो यह खतरे की घंटी है। इससे बचने के लिए आप अपने ऑफिस के पास घर लेकर समय और पैसे दोनों की बचत कर सकते हैं। आप वैसी कार या बाइक का इस्‍तेमाल करें जिसमें ईंधन की खपत कम हो। इसके अलावा, आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट का भी इस्‍तेमाल अधिक से अधिक करें।

बच्‍चों की शिक्षा पर 6 से 10 फीसदी

हर मां-बाप अपने बच्चे को अच्‍छे से अच्‍छे स्‍कूल में शिक्षा दिलाना चाहता है। यह एक भावनात्मक पहलू है और इस चक्‍कर में वह भावना में बहकर फैसला लेता है। इससे बचने की कोशिश करें। आप अपनी आमदनी के अनुसार ही स्‍कूल का चयन करें। बच्‍चों की शिक्षा पर 6 से 10 फीसदी खर्च होना चाहिए। अगर, इससे अधिक आप कर रहे हैं तो आप फाइनेंशियल रूप से स्थिर नहीं हो सकते हैं।

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