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साइकिल से गठबंधन करने वाली कांग्रेस अपने नेताओं को बांटेगी चमचमाती बुलेरो

Updated: IST congress
कांग्रेस ने क्यों उठाया ये कदम, पढ़ें पूरी खबर...

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी के जनपदों में संगठन की स्थिति कमजोर स्थिति को भांपते हुए अब आलाकमान ने कई नए कदम उठाने की तैयारी की है। जिलाध्यक्षों में फेरबदल की संभावना के साथ ही अब जनपदों में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने के लिए पहले की तरह एक-एक बुलेरो कार दी जाएगी। इसके बाद में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले कार्यक्रम में संगठन को मजबूती मिल सकेगी। गाड़ी दौड़ाने के लिए उन्हें डीजल खर्च दिया जाएगा या नहीं। ये अभी तक नहीं हुआ है।

2007 के चुनाव में मिली थी कार

दरअसल 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जिलाध्यक्षों को नई बुलेरो गाड़ियां दी गयी थी, ताकि वे क्षेत्र में दौड़ सकें। इसके अलावा 50 हजार रुपये की राशि डीजल के लिए दी गई थी। जिलाध्यक्षों ने इसका सदुपयोग भी किया। हालांकि बाद में कुछ अन्य प्रदेशों में होने वाले चुनाव के लिए सभी जिलाध्यक्षों से गाड़ी यह कह कर मंगवा ली गयी थी कि इन गाड़ियों को बाकी प्रदेशों में चुनाव के लिए भेजा जाना है और बाद में वापस उनको लौटा दी जाएगी। लेकिन उन गाड़ियों का अभी तक कुछ पता भी नहीं है।

बे-कार जिलाध्यक्ष कार्यकर्ताओं पर है निर्भर

उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में अभी भी कुछ जिलाध्यक्ष बे-कार हैं। उन्हें क्षेत्र में जाना होता है तो वे किसी पदाधिकारी या पार्टी कार्यकर्ता का सहयोग लेते हैं। गाड़ी के लिए उन्हीं पर आश्रित रहते हैं। लिहाजा, समय से वे लोगों तक नहीं पहुंच पाते। समीक्षा बैठकों में इन सब बातों को पार्टी गंभीरता से ले रही है।

इसलिए कन्नी काट रहे थे पदाधिकारी

प्रदेश के केन्द्र स्तर के पदाधिकारियों को जब कहीं दौरे पर भेजा जाता है तो उन्हें बाकायदा किराए के साथ ही लॉजिंग-फूंडिंग की भी सुविधा पार्टी देती है। लेकिन यह सुविधा जिलाध्यक्षों को अभी तक नहीं है। जिलाध्यक्ष तो किसी तरह पदासीन होने के नाते चले भी जाते हैं लेकिन बाकी पदाधिकारी कोई न कोई बहाना बना कर कन्नी काट जाते हैं। लिहाजा इसी वजह से पार्टी में भीड़ कम होती जा रही है और लोग बचने लगे हैं।

जिलाध्यक्ष का कहना

जिलाध्यक्ष हरेन्द्र कसाना का कहना है कि आलाकमान बुलेरो दिए जाने की योजना पर विचार कर रहा है। निसंदेह इससे संगठन को मजबूती मिलेगी और प्रचार प्रसार में समय भी बचेगा। बुलेरों के आने की योजनाएं अमलीय जामा कब तक पहनेगी, इसकी समय सीमा के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।

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