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मोख्तार अंसारी गैंग में कलह!, गिरोह के ही सदस्य ने ली शार्प शूटर रामू मल्लाह की सुपारी

Updated: IST Contract killers
सुपारी किलर्स के पकड़े जाने पर हुआ खुलासा। कॉन्ट्रैक्ट किलर सुनील गुप्ता व जान मुहम्मद ने खोले कई राज।

गाजीपुर. तो क्या बाहुबली मोख्तार अंसारी के गैंग में कलह बढ़ गई है। गिरोह के सदस्य आपस में ही एक दूसरे की जान के दुश्मन बन बैठे हैं। दरअसल पुलिस के हत्थे चढ़े दो सुपारी कॉन्ट्रैक्ट किलर्स के कबूलनामे में जो बातें सामने आयी हैं उनसे आसार ऐसे ही दिख रहे हैं। दोनों मोख्तार गैंग के शार्प शूटर रामू मल्लाह को मारने के लिये सुपारी ले चुके थे। यह सुपारी गैंग के ही दूसरे सदस्य ने दी थी। पुलिस कप्तान अरविंद सेन ने मीडिया के सामने दोनों को पेश किया और उनकी पूरी कहानी, बतायी जो पूर्वांचल में अपराध के नए समीकरणों की ओर इशारा करता है।

कैसे पकड़े गए सुपारी किलर्स
दरअसल पुलिस यूपी चुनाव के मद्देनजर गश्त और चेकिंग तेज कर चुकी है। इसी के तहत जांच और चेकिंग अभियान चला रहा है। पुलिस ने गुरुवार को क्राइम ब्रांच की मदद से सुनील गुप्ता और चांद बाबू उर्फ जान मुहम्मद को गिरफ्तार किया। पुलिस को यह तो पता था कि दोनों कांट्रैक्ट किलर्स हैं, पर उन्हें यह नहीं पता था कि उन्होंने किसकी सुपारी ली है। पुलिस ने जब पूछताछ की तो जो बातें सामने आयीं उसको सुनकर वह भी हैरान रह गई। दोनों ने बाहुबली मोख्तार गैंग के शार्प शूटर और रामू मल्लाह की सुपारी ली थी। यह सुपारी किसी और ने नहीं बल्कि मोख्तार गैंग के ही एक दूसरे सदस्य ने दी थी।

ये है पूरी कहानी
पुलिस की पूछताछ में चांद बाबू ने पुलिस को बताया है कि उसे नोनहरा थाने के हिस्ट्रीशीटर राजेंद्र राजभर उर्फ पंडित ने रामू मल्लाह की हत्या के लिये पांच लाख रुपये की सुपारी दी थी। सुपारी लेकर वह हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए पंडित के साथ बाइक से जा रहा था। इसी दौरान वाहन चेकिंग में पुलिस के हत्थे चढ़ गया। मौके से पंडित भागने में सफल रहा। पंडित भी मुख्तार गैंग का ही सदस्य है। पुलिस कप्तान अरविंद सेन ने बताया कि पूरा मामला मऊ के एक विवादित भूखंड का है। उस मामले की सुलह के लिए एक पक्ष ने मुख्तार गैंग से संपर्क किया। सुलह की जिम्मेदारी रामू मल्लाह तथा पंडित को सौंपी गई। इस सुलह के एवज में गैंग को 25 लाख रुपय मिले। उसमें 15 लाख रुपये गैंग लीडर के खाते में गए। शेष रुपये रामू मल्लाह तथा पंडित के बीच बंटने थे, लेकिन रामू मल्लाह ने अकेले ही रुपये हड़प लिये। पंडित ने उन रुपयों के लिए कई बार रामू मल्लाह पर दबाव बनाया, लेकिन उसने एक नहीं सुनी। तब पंडित ने कांट्रैक्ट किलर चांद बाबू से संपर्क किया। संयोग रहा कि वारदात को अंजाम देने से पहले कांट्रैक्ट किलर चांद बाबू अपने साथी सुनील गुप्ता के साथ पकड़ा गया। कप्तान ने बताया कि यह पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने पुलिस टीम को अपनी ओर से पांच हजार रुपये के ईनाम की घोषणा की।

कई राज्यों में की हत्याएं, पर कहीं नहीं आया नाम
कप्तान अरविंद सेन के मुताबिक पुलिस के हत्थे चढ़े सुनील गुप्ता और चांद बाबू ने महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, झारखण्ड समेत कई राज्यों में काली पासी और राजन गिरोह के साथ दर्जनों हत्‍या और लूट जैसे संगीन अपराधों को अंजाम दिया है। बावजूद इसके वह कहीं भी नामजद नहीं हुए। चांद बाबू पांच साल तक कुवैत भी रहा है। सुनील गुप्ता और चांद बाबू उर्फ जान मुहम्मद जिन्हें क्राइम ब्रांच की मदद से शहर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर किया है। इनके कब्जे से नाइन एमएम पिस्तौल और तमंचा व कारतूस भी बरामद किया गया।

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