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एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, सावन में नेपाल तक से आते हैं भक्त

Updated: IST shivling
एशिया के सबसे बड़े शिवलिंग को मुगलों ने किया था नुकसान पहुंचाने का प्रयास

गोंडा। जिले से 35 किमी दूर खरगूपुर में स्थित पृथ्वी नाथ मंदिर में एशिया की सबसे बड़ी, काले पत्थर की शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव भीम द्वारा की गई थी। साथ ही अन्य भाइयो द्वारा चारो कोनो पर शिवलिंग की स्थापना की थी।

क्या है मान्यता

कहा जाता है कि इसक्षेत्र में बकासुर नाम का एक राक्षस रहता था जिसका बहुत आतंक था। प्रति दिन दर्जनो लोगो की हत्‍या कर आधे अधूरे मांस को खा जाता था। एक दिन पूरे नगर के लोग बकासुर के पास जाकर उससे निवेदन किया कि वे अपने अवास पर रहे हम लोग एक एक कर खुद आएंगे। इस पर बकासुर तैयार हो गया और प्रत्‍येक दिन एक एक कर बकासुर के पास जाता जिसे वह भोजन बना लेता। एक दिन एक वृद्वा का नम्‍बर आया जिसका एक ही पुत्र था। वह बहुत दुखी थी। उसके घर भीम पहुंच गये पूछा आप दुखी क्‍यो है तो वृद् ने कहा आज मेरे इकलौते लडके का नम्‍बर है। भीम ने कहा आप दुखी न हो मै आप का लडका बनकर जाउंगा और युद्व कर उसका वध कर दुंगा। भीम और बकासुर राक्षस के बीच 28 दिनो तक मलयुध् होने से गड्ढा हो गया जिसे अब पोखरे के रूप में उपयोग किया जाता है। यहाँ सावन के प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक का अपना अलग ही महत्व है।

मुगलों ने पहुंचाया था नुकसान

मुगल शासन काल में यहाँ की काफी मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था और मुख्य शिवलिंग को भी क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया गया। लेकिन मुगल शासक इसमें सफल नहीं हुए ।

एशिया के सबसे बड़े इस शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए प्रदेश के कोने कोने और नेपाल से भारी संख्या में शिवभक्त आकर जलाभिषेक करते है। यहाँ विशेषकर सावन में पुरे माह, काजलीतीज व् शिवरात्रि को लाखो की संख्या में कांवरीये यहाँ जलाभिषेक करते है

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