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इस शिकागो में गैंगवार तो ख़त्म हो गए लेकिन माफिया बढ़ गए

Updated: IST gorakhpur
हर क्षेत्र में पांव पसार लिया माफिया ने, खाकी-खादी के संरक्षण में काले धंधे को खूब बढ़ाया

धीरेन्द्र विक्रमादित्य गोपाल
गोरखपुर. माफिया और इनके बीच आये दिन होने वाले गैंगवार ने गुरु गोरक्षनाथ, महावीर स्वामी, संतकबीर और महात्मा बुद्ध की धरती गोरखपुर को भारत का शिकागो बना दिया था। गैंगवार तो पिछले कुछ दशकों में थम गए लेकिन आज भी न माफिया कम हुए न इनके कारनामें। पुलिस की रिकॉर्ड ही अगर देखें तो गोरखपुर जोन में माफिया की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। यह केवल ठेकेदारी, रंगदारी और जमीन कब्ज़ा तक सीमित नहीं हैं बल्कि हर विभाग में सरकारी गठजोड़ कर काले साम्राज्य का दायरा बढ़ा रहे।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद गोरखपुर के आईजी मोहित अग्रवाल ने सभी जिलों से विभिन्न विभागों में सक्रिय माफियाओं को चिन्हित करने का निर्देश दिया था। फौरी तौर पर आई रिपोर्ट पर अगर यकीन करें तो जोन में 370 माफिया अपने काले धंधे में लगे हुए हैं। आबकारी क्षेत्र में सबसे अधिक माफिया चिन्हित किये गए हैं। शराब के धंधे में 71 सरगना अपने संगठित गिरोह का संचालन कर रहे और शासन सत्ता के लिए चुनौती बने हुए हैं। जोन के हजारों गांव ऐसे हैं जहां अवैध शराब खुलेआम बनाई और बेचीं जाती है। कच्ची से लेकर विदेशी शराब तक का धंधा माफिया के देखरेख में धड़ल्ले से हो रहा। शराब के धंधे के बाद हरियाली पर भी माफिया ग्रहण लगा रहे।

वन क्षेत्र में 60 वन माफिया चिन्हित किये गए हैं। जोन में बालू से लेकर मिट्टी तक के खनन पर माफिया का कब्ज़ा है। पुलिस के रिकॉर्ड में 44 माफिया खनन के अवैध धंधे में लगे हैं। रात गहराने के बाद सड़कों पर बेतहाशा दौड़ते डंपर, ट्रैक्टर-ट्राली, ट्रक की संख्या से इस धंधे की व्यापकता और गठजोड़ को आसानी से समझा जा सकता है। योगी आदित्यनाथ के हनक वाले इस क्षेत्र में गोवंश तस्करी भी व्यापक पैमाने पर है। इसमें भी माफिया का दखल है। 33 संगठित गिरोह इस धंधे में लगा हुआ है जो खाकी और खादी के संरक्षण में फैलता जा रहा। अवैध वाहन को सड़कों पर दौड़वा रहे 11 माफिया भी पुलिस की नज़र में हैं। विभिन्न क्षेत्रों से भी 135 सरगना पुलिस की रडार पर हैं जो काली कमाई से व्यवस्था को पंगु बनाये हुए हैं।

सबसे अधिक भू-माफिया लेकिन चिन्हित हुए बेहद कम

अगर माफिया की सबसे अधिक धमक किसी क्षेत्र में है तो वह प्रॉपर्टी का धंधा है। गोरखपुर और आसपास के इलाकों में भू-माफिया का ही सिक्का चलता है। इन माफियाओं को समाज का कुलीन वर्ग है उसका संरक्षण है। खाकी, खादी से लेकर बहुत सारे डॉक्टर-इंजीनियर, व्यवसायी इनके साथ धंधा कर रहे और करोड़ों रुपये लगाये हैं। लेकिन पुलिस महज 7 भू माफिया को ही चिन्हित कर पाई है। यही हाल गरीबों के राशन के अवैध ढंग से बेचने के धंधे में भी है। लेकिन चिन्हित केवल 2 ही हो सके हैं। जबकि जोन में ही प्रदेश का सबसे बड़ा खाद्यान्न घोटाला हुआ था जो शासन स्तर पर फाईलों में गुम है। इसी तरह ठेके में दखल वाले 4 माफिया और ड्रग क्षेत्र में 3 माफिया सक्रिय हैं।

जिलेवार चिन्हित माफिया

गोरखपुर- 50
कुशीनगर-08
देवरिया-17
महराजगंज-36
बस्ती-50
सन्तकबीरनगर-41
सिद्धार्थनगर- 11
गोंडा-59
बलरामपुर-45
बहराइच-30
श्रावस्ती-23

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