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Video Icon सीएम योगी के जिले में सरकारी अस्पतालों में झोलाछाप डॉक्टर करते हैं इलाज, कई मरीजों की जा चुकी है जान

Updated: IST Fake Doctor
इस सरकारी अस्पताल में लापरवाही से जा चुकी है मरीज की जान

गोरखपुर. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वास्थ्य सुधार की कोशिशों को लालफीताशाही पलीता लगा रही। सरकारी अस्पतालों में लोगों की ज़िन्दगियों संग खिलवाड़ किया जा रहा। आलम यह कि डॉक्टर नदारद रह रहे और उनसे सांठगांठ कर झोलाछाप सरकारी अस्पतालों में धड़ल्ले से इलाज कर रहे। रविवार को कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे एक बच्चे का इलाज फार्मासिस्ट व एक झोलाछाप ने करने की कोशिश की। टॉर्च की लाइट में ही इलाज किया और जब मामला बिगड़ने लगा तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। दुखद यह कि बच्चे की जान जिला अस्पताल ले जाते वक़्त रास्ते में ही चली गई।

Fake Doctor Treatment

रविवार को कुशीनगर के परसौनी गांव के आठ वर्षीय मासूम विक्की को किसी जहरीले सांप ने डस लिया। आनन फानन में परिजन उसे नेबुआ नौरंगिया स्वास्थ्य केंद्र और लेकर पहुंचे। वहां हर बार की तरह डॉक्टर नहीं थे। कुछ प्राइवेट युवक व एक फार्मासिस्ट मौजूद था। मासूम का यही लोग इलाज करने लगे। केंद्र और बिजली नहीं थी तो टॉर्च के अंधेरे में ही इलाज शुरू कर दिया। देखते ही देखते मासूम की हालत बिगड़ने लगी। जब मामला इन लोगों की हद से निकलने लगा तो ज़िला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन मासूम की रास्ते में ही मौत हो गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर रहते ही नहीं हैं। यहां उनकी शह पर प्राइवेट लोग ही इलाज करते हैं। जब वह रहते हैं तब भी यही लोग सारी व्यवस्था सम्भालते है। अगर कोई अंजान आ जाये तो पता ही न चले कि ये झोलाछाप (अप्रशिक्षित) यहां पर कार्यरत नहीं हैं।

इसी अस्पताल में झोलाछाप ने कर दिया था ऑपरेशन

अभी कुछ दिनों पहले भी इनलोगों द्वारा गैजिम्मेदारना तरीके से ऑपरेशन किये जाने का मामला सामने आया था। 1 जून की खजुरी निवासी आमोद पांडेय का एक्सीडेंट हो गया। लोग उनको नजदीक के सरकारी अस्पताल के लाये। परिजन बताते हैं कि वहां मौजूद एक युवक ने डॉक्टर के नहीं होने की बात बताई और खुद ही ऑपरेशन कर दिया। जबतक वह लोग दुर्घटना की बात सुन वहां पहुंचे उसने इलाज कर दिया था। परिजन उनको घर ले जाने लगे तो रास्ते में अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। ब्लीडिंग ज्यादा होने और हालत बिगड़ते देख आमोद पांडेय को लेकर घरवाले गोरखपुर के एक निजी अस्पताल के लेकर गए। किसी तरह वहां डॉक्टर ने ब्लीडिंग रोकी। लेकिन दिन ब दिन उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी। हालत बिगड़ते देख परिजन उनको गोरखनाथ क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में ले गए जहां उनका ऑपरेशन किया गया। जब पुराना टांका खोला गया तो अंदर घासफूस काफी मात्रा में निकला। परिजन ने बताया कि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर में बताया कि पैर सड़ रहा रहा। किसी तरह आपरेशन किया जा सका।

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इस सरकारी अस्पताल में लापरवाही से जा चुकी है मरीज की जान

नेबुआ नौरंगिया के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर का काम यहां तैनात डॉक्टर की शह पर प्राइवेट कर्मचारी ही करते हैं। हद तो यह कि ये कर्मचारी बेहिचक ऑपरेशन तक कर देते हैं। कुछ महीने पहले एक व्यक्ति की जान इन लोगों की लापरवाही से चली गई। आक्रोशित लोग सड़क पर आ गए। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर लोग शांत हुए।

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