Patrika Hindi News

बैंक में जमा हैं 23 लाख रूपये पर बेटे के कफन के लिए पिता को लेना पड़ा कर्ज

Updated: IST death
बेटे की लाश को दरवाजे पर छोड़ चिता जलाने के लिए कर्ज मांगता रहा पिता

गोरखपुर. पीएम मोदी की नोटबंदी से भले ही जनता का समर्थन मिल रहा हो। भले कही भाजपा के लोग इसके फायदे गिना रहे हों पर अपने पैसे के लिए कुछ लोगों को जिस दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है उसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे।

जी हां यह वाकया यूपी के गोरखपुर का है जहां सुबरात के बैंक खाते में 23 लाख रुपये जमा हैं लेकिन बेटे की लाश दफनाने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा। बुधवार की सुबह दरवाजे पर बेटे की लाश छोड़कर वह रुपये निकालने बैंक पहुंचे थे। दिन भर गिड़गिड़ाते रहे और बैंक प्रबंधक नियमों की दुहाई देते रहे। सुबरातकी इस बेबसी को गांव को लोग भी सहन नहीं कर सके और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा लोगों ने ठान लिया कि हर हाल में सुबरात को न्याय दिलाकर ही दम लेगें। लोगों ने कहा कि आखिर हमारी मेहनत का पैसा ही अगर हमारे काम न आ सका तो क्या फायदा।

जंगल कौड़िया क्षेत्र के चिऊटहां निवासी सुबराती अली के 40 वर्षीय पुत्र जब्बार अली लुधियाना में सिलाई का काम करते थे। 29 नवम्बर की शाम को उनकी मौत हो गई। लुधियाना में उनके साथ रह रहे परिवारीजनों ने एम्बुलेंस रिजर्व किया उनका शव लेकर गांव पहुंचे। एम्बुलेंस का भाड़ा और जनाजे के खर्च के लिए पिता सुबराती के पास रुपये नहीं थे।

सुबराती ने अपने बैंक खाते में 23 लाख रुपए जमा किए हैं। मुश्किल के इस दौर में सुबरात को जब पैसे की जरूरत पड़ी तो सुबरात रुपसे निकालने के लिए बैंक पहुंचे। फिर क्या था शुरू हो गई सरकार के सभी बड़े वादे की सही कहानी, एसबीआई के शाखा प्रबंधक व कैशियर ने दो हजार रुपये से अधिक देने से मना कर दिया। और तमाम नियम कानून की दोहाई दने लगे एक तरफ पिता की चौखट पर बेटे की लाश तो दूसरी तरफ अपने पैसे के लिए बैंक प्रशासन का ये रवैया पिता की पीड़ा को लगातार बढ़ा रहा था। लोगों कि मानें तो मुश्किल दिनों में अपनी मुश्किलों को दूर करने के लिए पिता ने अपनी जमीन बेचकर ये पैसे रखे थे। पर इस पैसे का क्या था क्यूकि कि अब ये पैसे तो बैंकत के हाथ जो था।

जब इस बात की जानकारी स्थानीय लोगों को हुई तो वे आक्रोशित हो गए। भीड़ बैंक पर पहुंच गई और प्रबंधक पर भुगतान का दबाव बनाने लगी। हालांकि बैंक मैनेजर ने देर शाम को सुबराती को 50 हजार रूपये भिजवा दिये । उधर सुबराती को बेटे की दफनाने और एम्बुलेंस का किराया चुकाने के लिए कर्ज लेना पड़ा। इस तरह से व्यवस्था की चोट आम जनता पर पड़ना किस हद तक सही है। पैसे के लिए सरकार जितना भी वादा कर ले पर न तो बैंकों में अब तक सही व्यवस्था हो सकी है न एटीएम पर भीड़ में कमी आ रही है। फिर इस तरह के हादसों में बैंक प्रशासन की लापरवाही हर किसी को हैरत में भी डाल रही है।

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को भारत मैट्रीमोनी पर साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???