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गोरखपुर में एम्स की राह हुई आसान, चिकित्सा विभाग को यूपी सरकार ने दी जमीन  

Updated: IST aiims
राजनीतिक लाभ के लिए मची सकारात्मक होड़

धीरेंद्र गोपाल
गोरखपुर. अब एम्स को लेकर राजनीति सकारात्मक दिशा में बढ़ती नज़र आ रही है। प्रदेश सरकार ने एम्स के लिए ज़मीन, बिजली, पानी, सड़क सबकी व्यवस्था कर दी है। लंबी कवायद के बाद शासन ने कूड़ाघाट स्थित गन्‍ना शोध संस्‍थान की 112 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम स्‍थानांतरित कर दिया है। एम्स की राह के सारे रोड़े हटाने के बाद प्रदेश सरकार ने गेंद अब केंद्र सरकार के पाले में उछाल दी है।

बता दें कि एम्स को लेकर काफी दिनों से प्रदेश और केंद्र सरकार में रार छिड़ी है। दोनों सरकारों में शामिल राजनेता एक दूसरे पर सहयोग न करने और एम्स की राह में रोड़ा अटकाने का आरोप लगा रहे थे। इसी आरोप-प्रत्यारोपों के बीच गोरखपुर में एम्स की घोषणा हुई। लेकिन फिर जमीन और निर्माण के लिए कुछ मूलभूत सुविधाओं मुहैया कराने पर राजनीति हुई। आरोप प्रत्यारोपों का दौर ऐसा चला की केंद्र और प्रदेश के मुखियाओं को जनता के बीच अलग-अलग मंच लगाना पड़ा।
आलम यह कि कुछ माह पूर्व गोरखपुर दौरे पर आये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की कि केंद्र सरकार जो भी एम्स के लिए आवश्यक बताएगी उसे पूरा किया जाएगा। केंद्रीय टीम को पसंद आई ज़मीन के लिए सड़क की बात आड़े आने पर उन्होंने बजट में प्राविधान करने की घोषणा की। कई ज़मीनों को देख चुकी केंद्रीय टीम ने इसके बाद अचानक से गन्ना शोध संस्थान की 112 एकड़ ज़मीन पर हामी भर दी जबकि पूर्व में यह टीम इस ज़मीन को सिरे से नकार चुकी थी।

22 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़र्टिलाइज़र के शिलान्यास के साथ एम्स का भी शिलान्यास कर दिया। उन्होंने एम्स को जल्द से जल्द शुरू कराने के लिए बजट आवंटन तक की घोषणा कर दी। पीएम के इस मास्टरस्ट्रोक के बाद फिर प्रदेश सरकार पर ज़मीन हस्तांतरण में देरी का आरोप लगा। अभी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल ही रहा था कि केंद्रीय टीम बीते दिनों आकर गन्ना शोध संस्थान की ज़मीन पर पुराने भवनों में ही ओपीडी चलाने की संभावना तलाशने लगी।

विधानसभा चुनावों की घोषणा के बीच हो रही इस कवायद के बाद प्रदेश सरकार भी किसी प्रकार का आरोप झेलने के मूड में नहीं दिखी। ओपीडी को लेकर केंद्रीय टीम के दौरे के बाद कहीं प्रदेश सरकार पर ज़मीन हस्तांतरित करने में देरी करने का आरोप न लगे इसलिए उसके पहले ही राज्य सरकार ने ज़मीन हस्तांतरण की कार्रवाई कर दी। लंबी कागजी कार्रवाई के बाद गुरुवार को शाम चार बजे गन्ना शोध संस्थान के डायरेक्टर डॉ. बीएल शर्मा ने प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम जमीन हस्तांतरण कर दी। यह प्रक्रिया निबंधन दफ्तर द्वितीय में पूरा हुआ। इसके अलावा शासन ने पावर कार्पोरेशन को 25 एमवीए की बिजली मुहैया कराने का निर्देश दिया है। साथ ही जल निगम को रोज 15 लाख लीटर पानी की व्यवस्था करने को कहा है। वहीं, पीडब्ल्यूडी को एम्स तक फोरलेन बनाने का आदेश कर दिया है।

बहरहाल, विधानसभा चुनाव की घोषणा को देखते हुए अगर केंद्रीय टीम का दौरा करा मास्टरस्ट्रोक खेलने की कोशिश की गई है तो प्रदेश सरकार ने ज़मीन, बिजली, पानी, सड़क की त्वरित व्यवस्था कर रिवर्सस्ट्रोक खेल दिया है। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में चली गई है।

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