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खाद्य सुरक्षा विधेयक संसद में पेश

Govt withdraws ordinance, introduces Food Security Bill

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Govt withdraws ordinance, introduces Food Security Bill
8/7/2013 8:20:00 PM
Govt withdraws ordinance, introduces Food Security Bill

नई दिल्ली। देश की दो तिहाई से अधिक आबादी को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के प्रावधान वाले अध्यादेश को कानूनी जामा पहनाने के लिए बहुचर्चित खाद्य सुरक्षा विधेयक 2013 बुधवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया।

केन्द्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केवी थॉमस ने सदन में यह विधेयक पेश करते हुए कहा कि इससे देश के संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों का कोई हनन नहीं होगा। यह विधेयक पेश करने से पहले उन्होंने खाद्य सुरक्षा से संबंधित उस पुराने बिल को सदन की अनुमति से वापस ले लिया जिस पर पिछले बजट सत्र में चर्चा शुरू की गई थी।

विधेयक पेश करने का विरोध करते हुए अन्ना द्रमुक के एम थम्बीदुरै ने कहा कि इसके प्रावधानों को लेकर काफी आशंकाएं हैं और अगर यह पारित होता है तो तमिलनाडु एवं उन राज्यों को नुकसान झेलना पडेगा जहां पहले ही खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था है। इस विधेयक के कारण तमिलनाडु का खाद्यान्न कोटा कम हो जाएगा और उसे अतिरिक्त खर्च भी उठाना पडेगा। उन्होंने इसे खाद्य सुरक्षा के बजाय असुरक्षा बढ़ाने वाला विधेयक बताते हुए कहा कि सरकार इस पर पुनर्विचार करके दूसरा बिल लाए।

लोस द्रमुक के टी आर बालू ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक की धारा 3,9 और 10 में संशोधन पेश करेगी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सार्वजनिक वितरण के लिए राज्यों द्वारा खाद्यान्नों की खरीद को प्रतिबंधित करता है, इसलिए उनकी पार्टी इस प्रावधान का विरोध करती हैं। इस पर थॉमस ने कहा कि यह विधेयक राज्यों के अधिकारों का हनन नहीं करता है और संघीय ढांचे के अनुकूल है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के मुख्य बिंदु

-दो तिहाई आबादी को मिलेगा अधिक सब्सिडी वाला अनाज

- अति गरीब को 35 किलोग्राम प्रति परिवार मिलता रहेगा अनाज

- पात्र परिवारों की पहचान करेंगी राज्य सरकारें

- महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से पोषण संबंधी सहायता

- अनाज की आपूर्ति नहीं होने पर खाद्य सुरक्षा भत्ता

- खाद्यान्नों की राज्य से बाहर ढुलाई और रख-रखाव के लिए राज्यों को सहायता

- खाद्यान्नों की घर-घर तक आपूर्ति के लिए सुधार

- महिला सशक्तीकरण- सबसे बुजर्ग महिला घर की मुखिया होगी

- जिला स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र

- पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक लेखा परीक्षा और सतर्कता समितियां

- अनुपालन नहीं करने पर जुर्माना


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