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इन प्राचीन धरोहर को पयर्टन स्थल का दर्जा दिलाने की मांग हुई तेज 

Updated: IST temple
महाभारत और रामायणकाल से जुड़े हैं इन ऐतिहासिक धरोहरों के तार

ग्रेटर नोएडा। प्राचीन स्थलों को पयर्टन स्थल का दर्जा दिलाने की मांग तेज हो गई। यहां दर्जनों प्राचीन स्थल है। जिनके तार महाभारत और रामायणकाल से जुड़े हुए हैं। बिसरख में राम और रावण का मंदिर तो बिलासपुर में महारानी विक्टोरिया का किला मौजूद है। वहीं कासना में प्रेम का प्रतीक सत्ती निहालदे का मंदिर भी है। प्राचीन स्थलों को पयर्टक स्थल का दर्जा दिलाने को लेकर शासन को लेटर भेजा गया है। इससे पहले भी कई बार मांग उठ चुकी है।

समाजसेवी अमित पहलवान ने बताया कि शहर में कई प्राचीन स्थलों का जीणोउद्दार नहीं किया जा रहा है। जिसकी वजह से प्राचीन इमरतों की हालत काफी जर्जर हो गई है। उन्होंने बताया कि कई बार प्राचीन स्थलों को पयर्टन स्थल के रूप में डेवलप कराने की मांग की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि सत्ती निहालदे मंदिर को जीणोउद्दार अथॉरिटी की तरफ से किया जा रहा है।
प्रशासन के रिकॉर्ड में है दर्ज

शहर के प्राचीन स्थल प्रशासन के रिकॉर्ड में दर्ज है। जिसकी वजह से प्रशासन भी समय-समय पर इन प्राचीन स्थलों की देखरेख करता है। स्किनर स्टेट को शासन ने आजादी के समय ही कब्जे में ले लिया था। प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो जल्द ही कई स्थलों को जल्द ही पर्यटन स्थल का दर्जा मिल जाएगा।

ये है एतिहासिक स्थल

—बिलासपुर में इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया का किला आज भी मौजूद है। इस किले में कोर्ट, जेल व अस्तबल मौजूद है। यहां 999 गांव की पंचायत लगा करती थी। इससे स्किनर स्टेट के नाम से भी जाना जाता है।

—जेवर का दाउजी का मंदिर भी प्राचीन कालीन है। महाभारत काल से इस मंदिर के तार जुड़ते है।
—दादरी में छत्रपति की शिवाजी ने मंदिर बनवाया था। इस मंदिर में लोगों की भीड़ जुटती है।

—ग्रेटर नोएडा के कासना गांव में सती निहालदे का मंदिर भी आज भी विराजमान है। यह सती निहालदे और राजस्थान के राजा के बीच प्रेम की कहानी बयां करता है।
—बिसरख में द्रोण मंदिर भी है। महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य

—राम और रावण का मं​दिर भी है मौजूद

बिस​रख गांव रावण का जन्मस्थली माना जाता है। रावण के पिता विशरवा ऋषि ने शिवलिंग की स्थापना कर पूजा किया करते थे। यह शिवलिंग आज भी मौजूद है। साथ ही इस शिवलिंग की गहराई भी आज तक कोई नही जान सका है। ग्रामीणों ने इसकी गहराई नापने के लिए कई बार खुदाई तक की थी। यहां राम के साथ—साथ रावण का भी मंदिर बनाया गया है। इस गांव में रावण के पुतले का दहन नही किया जाता है।

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