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इस मंदिर में रुद्राभिषेक के लिए हर सावन में श्रीलंका से आते हैं रावण के वंशज

Updated: IST Shiv temple
बिसरख का शिव मंदिर भारत के साथ ही विश्व के कई देशों में प्रसिद्ध है। यहां श्रीलंका से भी श्रद्धालु शिवलिंग के दर्शन करने के लिए आते हैं।

ग्रेटर नोएडा. बिसरख का शिव मंदिर भारत के साथ ही विश्व के कई देशों में प्रसिद्ध है। यहां श्रीलंका से भी श्रद्धालु शिवलिंग के दर्शन करने के लिए आते हैं। श्रीलंका की जयलीथा खुद को रावण का वंशज भी बताती है। सावन माह में बिसरख के शिवमंदिर में खास महत्व माना जाता है। यहां दूर-दूर से लोग विशेष पूजा-अर्चना कराने आते हैं।

सावन के दूसरे सोमवार को भक्तों ने किया रुद्राभिषेक
सावन के दूसरे सोमवार को दूर-दूर से आए भक्तों ने शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया। वहीं, जाने-माने महंत भी पूजा करने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। सावन के माह में कालशर्प पूजा के साथ-साथ महामृत्यूजंय मंत्रों का जाप भी करा रहे हैं। वहीं 21 जुलाई को शिवरात्रि के अवसर पर बिसरख गांव में पूजा—अर्चना के लिए विशेष तैयारियां की जा रही है।

रावण के पिता ने की थी शिवलिंग की स्थापना
रावण के पिता विश्वरा ऋषि ने बिसरख गांव में शिवलिंग की स्थापना की थी। यह अष्टकोण शिवलिंग दूनिया की एकमात्र शिवलिंग बताई जाती है। वहीं, बिसरख गांव रावण का जन्मस्थली मानी जाती है। रावण ने इसी मंदिर में शिव की आरधना कर उनसे वरदान लिया था। इस मंदिर में कई प्रधानमंत्री भी शिवलिंग के दर्शन करने आ चुके हैं।

ये कर रहे है दावा
श्रीलंका की रहने वाली जयलीथा रावण को अपना वंशज बताती है। इनकी माने तो श्रीलंका में भी रावण का मंदिर मौजूद है। साथ ही ये खुद देख-रेख भी करती हैं। बिसरख के मंदिर में भी जयलीथा श्रीलंका से कई बार भारत आ चुके हैं।

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