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2016 सीरियाई बच्चों के लिए रहा सबसे बुरा साल, 652 ने गंवाई जान

Updated: IST seriya
सीरिया के गृहयुद्ध में 2016 में कम से कम 652 बच्चे मारे गए। देश की भावी पीढ़ी के लिए इसे यूनीसेफ ने आज तक का सबसे बुरा साल बताया है।

दमिश्क. सीरिया के गृहयुद्ध में 2016 में कम से कम 652 बच्चे मारे गए। देश की भावी पीढ़ी के लिए इसे यूनीसेफ ने आज तक का सबसे बुरा साल बताया है। जिंदा बचे सीरिया के युवाओं में टॉक्सिक तनाव के लक्षण दिख रहे हैं। स्कूल, अस्पताल, पार्क या घर- सीरिया में बच्चों की ऐसी कोई भी जगह नहीं बची, जो हिंसा की शिकार न बनी हो। यूएन बाल राहत एजेंसी ने बताया है कि सरकार, उसके विरोधी और दोनों पक्षों के समर्थकों ने गृहयुद्ध की हिंसा में युद्ध के नियमों की सरासर अनदेखी की।

हिंसा के आसान शिकार होते हैं बच्चे
बाल्कान रूट बंद हो गया है। इसका फैसला स्लोवेनिया, सर्बिया और क्रोएशिया ने किया। उत्तरी ग्रीस के इडोमेनी शहर में 10,000 शरणार्थी फंस गए हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संस्था के अनुसार कैंप में रहने वाले लोगों में आधे बच्चे हैं। सीरिया युद्ध के छह साल बीतने पर यूनीसेफ ने ये रिपोर्ट पेश की है। जनता की क्रांति से शुरू होकर सीरियाई संकट ने धीरे-धीरे गृहयुद्ध का रूप ले लिया। हिंसा में बच्चे सबसे पहले और आसान शिकार बनते हैं। समय के साथ युद्ध ने और भी हिंसक शक्ल ले ली।

स्कूलों में मारे गए 255 बच्चे
यूनीसेफ ने कहा कि पिछले एक साल में ही कम से कम 255 बच्चे स्कूल में या स्कूल के पास मारे गए। हिंसा प्रभावित इलाकों के करीब 17 लाख छोटे बच्चों को स्कूल छोडऩा पड़ा। इस समय सीरिया के हर तीन में से एक स्कूल इस्तेमाल के लायक नहीं है। कई स्कूलों में सशस्त्र गुटों ने कब्जा कर रखा है। करीब 23 लाख सीरियाई बच्चे दूसरे देश में शरणार्थी हैं।

851 बच्चे बनाए गए बाल सैनिक
यूनीसेफ की रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल सुविधाओं और यातना के शिकार हुए बच्चों की मदद के अन्य साधनों की कमी के कारण बच्चे लड़ाई के हथियार बनाए जा रहे हैं। 2016 में कम से कम 851 बच्चों को बाल सैनिक बनाए जाने की जानकारी है, जो कि एक साल पहले के मुकाबले दोगुनी है। कई बच्चे तो ऐसी बीमारियों से ग्रस्त होकर जान गंवा रहे हैं, जिनका इलाज आसानी से हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय चैरिटी सेव द चिल्ड्रेन ने बताया है कि युवाओं में टॉक्सिक तनाव के लक्षण दिख रहे हैं।

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