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महीने के पहले ही दिन दोपहर में बंद हो गए बैंक, परेशान लोगों को नहीं

Updated: IST que on bank
नोटबंदी के बाद से पहली बार बैंकों में आई सैलेरी व पेंशन के चलते दिसंबर महीने के पहले दिन बैंकों में अफरा-तफरी का माहौल दिखा।

ग्वालियर। नोटबंदी के बाद से पहली बार बैंकों में आई सैलेरी व पेंशन के चलते दिसंबर महीने के पहले दिन बैंकों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। आमजन के साथ-साथ वेतनभोगी और पेंशनर्स सुबह 9.30 बजे से बैंकों के बाहर कतारबद्ध होने लगे थे।

बैंकों के खुलते ही ये कतारें बढ़ गई थीं। कुछ बड़े बैंकों को छोड़ दें तो गुरुवार को करीब-करीब सभी बैंकों में लोगों को मनमाफिक रकम नहीं मिल पाई। यहां तक कि कई बैंकों ने लंच के समय में दोपहर 2.30 बजे बाद ही मेन गेट को बंद कर दिया। इससे बाहर से आने वाले ग्राहक बाहर ही खड़े रह गए और बैंककर्मियों को कोसते देखे गए। वहीं शहर के एटीएम में भी नोटों की कमी रही।

पेंशनर्स की भीड़ अधिक
गुरुवार को महीने के पहले दिन बैंकों में पेंशनर्स की भीड़ अधिक दिखाई दी। बैंककर्मियों का कहना था कि वेतनभोगी कर्मचारियों की भीड़ वेतन के लिए अगले दो-तीन में बढ़ सकती है।

एटीएम ने किया निराश
गुरुवार को भी शहर के अधिकांश एटीएम पर रुपए नहीं होने के कारण लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। एटीएम में कार्ड लगाने के बाद उन्हें स्क्रीन पर कैश नॉट एवेलेबल दिखाई दिया। एसबीआई के एटीएम में जरूर लोगों को 2000 और 500 रुपए के नए नोट मिल रहे थे। वहीं, कई एटीएम पर 'कैश नहीं है' लिखा हुआ था।

मप्र ग्रामीण बैंक को नहीं मिल पा रहे नए नोट
नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक पर दिखाई दे रहा है। इस बैंक की शाखाओं में ग्राहकों की जरूरत का दस फीसदी भी पैसा नहीं मिल पा रहा है। इससे न केवल किसानों को खाद-बीज के लिए परेशान होना पड़ रहा है बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी नोटों के लेनदेन में भारी परेशानी हो रही है।
इस मामले में जिला प्रशासन ने भी हस्तक्षेप किया पर भी नोटों की कमी खल रही है। हैरानी की बात तो यह है कि जिले की 20 शाखाओं में तो 25 दिनों से बिल्कुल भी राशि नहीं दी जा सकी।

'दो दिन पहले ही शिकायत मिली थी कि मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखाओं को नए नोट नहीं मिल पा रहे हैं। इसी आधार पर लीड बैंक मैनेजर से समस्या का निराकरण करने को कहा था।'
- शिवराज सिंह वर्मा, प्रभारी कलेक्टर

'जिले में मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक की 20 शाखाएं हैं। इनमें से किसी को भी नए नोट नहीं दिए जा सके। नोटों की कमी के चलते यह हालात बने हैं।'
- डीके जैन, लीड बैंक मैनेजर

छिंदवाड़ा में है मुख्यालय
मप्र ग्रामीण बैंक की जिले की किसी भी शाखा को बिल्कुल भी राशि नहीं दी जा सकी। यह बात जिले के लीड बैंक प्रबंधन ने भी स्वीकार की है। इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि उन्हें जरूरत के हिसाब से नोट मिल ही नहीं पा रहे। इसके अलावा संभागीय कार्यालय भी यहां स्थित है। इस तरह बैंक के हजारों उपभोक्ता हैं, जिन्हें आए दिन नोटों की कमी के चलते परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीण बैंक प्रबंधन ने जिला प्रशासन से जो शिकायत की है उसके मुताबिक हर रोज उन्हें करीब एक करोड़ रुपए चाहिए उसके बदले में संभाग भर के जिलों में न के बराबर पैसा दिया जा रहा है।

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