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कुपोषण से जंग:  कुपोषण में लापरवाही पर डीपीओ जयवंत वर्मा निलंबित, कमिश्नर चंबल संभाग की कार्रवाई

Updated: IST MALNUTRITION DEATH
कार्यकर्ता, सीडीपीओ के बाद गुरुवार को जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी जयवंत वर्मा को कमिश्नर चंबल संभाग द्वारा निलंबित कर दिया गया है।

ग्वालियर। कुपोषण से 40 मौतों के बाद चेती सरकार ने जहां इसकी रोकथाम के प्लान पर अमल शुरू कर दिया है। वहीं कुपोषण के जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी जारी है।

कार्यकर्ता, सीडीपीओ के बाद गुरुवार को जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी जयवंत वर्मा को कमिश्नर चंबल संभाग द्वारा निलंबित कर दिया गया है। इन्हें कलेक्टर की अनुशंसा पर निलंबित किया गया है। इनको कुपोषण सहित अन्य कारणों से मौतें होने और इस अवधि में बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के अनुपस्थित रहने के चलते निलंबित किया गया है।

जांच के लिए केन्द्रीय दल आज श्योपुर आएगा
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने श्योपुर जिले में कुपोषण हो रही बच्चों की मौत पर चिंता जताते हुए केन्द्रीय जांच दल को 23 सितंबर को तत्काल श्योपुर भेजने के निर्देश दिए हैं। यह जांच दल 26 सितंबर सोमवार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगा। गांधी ने यह निर्देश तब दिए जब उन्हें पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यहां की वस्तुस्थिति से अवगत कराया। सिंधिया गुरुवार को क्षेत्र के नेताओं के साथ केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी से मिलने पहुंचे। साथ ही सिंधिया ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी मुलाकात कर क्षेत्र की कमियों को दूर करने की मांग की।

सिंधिया ने गांधी को बताया कि श्योपुर जिले में कुपोषण के कारण 19 बच्चों की अकाल मृत्यु हो चुकी है। केन्द्र सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वे में पिछले दिनों में 106 गांवों में केवल पांच दिन में ही 461 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इनमें 145 बच्चे अति कुपोषित हैं।

उन्होंने गांधी को बताया कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 16 गांवों में एक माह में 62 बच्चों की मौत कुपोषण से हो चुकी है। विधानसभा में भी सरकार ने स्वीकार किया है कि श्योपुर जिले में 80918 बच्चों में से 19724 बच्चे कुपोषित है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मध्यप्रदेश कुपोषण के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश सरकार बदतर होते जा रहे हालातों के बाद भी इसे अनदेखा कर रही है।

मामला राजनीतिक नहीं मानवीय
सिंधिया ने कहा कि यह मामला राजनीतिक नहीं मानवीय एवं संवेदनशील है। मध्यप्रदेश में पिछले 12 साल में 7800 करोड़ का पोषण आहार बटा है। यह आहार कौन खा रहा है यह भी जांच का विषय है। उन्होंने बताया कि मैंने खुद यहां का दौरा किया है। दौरे में जो हकीकत सामने आई है वह भयावह है। 2006 में सर्वोच्च न्यायालय में यहां हुई 20 बच्चों की मौत पर ज्वाइंट कमीशन ऑफ इंक्वायरी की स्थापना की थी जिसमें 94 प्रतिशत बच्चे कुपोषित पाए गए थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 10 साल बाद भी यहां के हालात नहीं सुधरे है।

भ्रष्टाचार के कारण पोषण आहार बंट ही नहीं रहा है। प्रदेश सरकार केन्द्र द्वारा दी जाने वाली राशि का दुरुपयोग कर रही है। सिंधिया ने बताया कि सोमवार को जांच रिपोर्ट आते ही इस मामले में कार्यवाही के लिए विभाग की बैठक भी बुलाई है। सिंधिया ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र की कमियों को दूर करने की मांग की है। इस दौरान उनके साथ विजयपुर के विधायक रामनिवास रावत तथा श्योपुर के जिलाध्यक्ष बृजराज सिंह चौहान, रामलखन, रीतेश, रामेश्वर भी उपस्थित थे।

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