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इस रेलवे रूट पर रोज होता है मौत का सफर, रेलवे है बेखबर

Updated: IST indian railway
ग्वालियर से श्योपुर के बीच चलने वाली नैरोगेज यूंतो यहां की लाइफ लाइन कही जाती है मगर रेलवे की लापरवाही इसे लोगों के लिए मौत का सफर बना रही है। दरअसल बात ये है कि इस रूट पर ये एकलौती ट्रेन है इसलिए जाहिर है कि इस रूट का पूरा बोझ इस ट्रेन को ही ढ़ोना पड़ता है।

ग्वालियर/श्योपुर। ग्वालियर से श्योपुर के बीच चलने वाली नैरोगेज यूंतो यहां की लाइफ लाइन कही जाती है मगर रेलवे की लापरवाही इसे लोगों के लिए मौत का सफर बना रही है। दरअसल बात ये है कि इस रूट पर ये एकलौती ट्रेन है इसलिए जाहिर है कि इस रूट का पूरा बोझ इस ट्रेन को ही ढ़ोना पड़ता है।

ऐसे में ट्रेन के अंदर जगह न मिले तो लोग इसकी छत पर बैठकर भी सफर का मजा ले लेते है। मगर ये मजे का सफर लोगों के लिए मौत का सफर भी साबित हो रहा है। ऐसा ही वाकया मंगलवार को देखने में आया, जब एक छात्र ट्रेन की छत से गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

यहां बता दें कि धीरोली निवासी इंद्रजीत 22 वर्ष पुत्र बाबूलाल राजपूत मंगलवार को तब ट्रेन की छत से गिर गया, जब वह श्योपुर से परिजनों से मिलने के लिए अपने गांव जाने के लिए दोपहर को सबलगढ़ जाने वाली नैरोगेज ट्रेन की छत पर बैठा था। गिरधरपुर-दुर्गापुरी स्टेशन के बीच वह अचानक ट्रेन की छत से नीचे गिर पड़ा और बुरी तरह घायल हो गया,जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। जहां उसकी गंभीर हालत को देखकर उसे प्राथमिक उपचार के बाद रैफर कर दिया गया। कोटा राजस्थान ले जाने के दौरान इंद्रजीत राजपूत की मौत हो गई।

डीआरएम को लिखेंगे पत्र : नापाखेड़ली
ट्रेन से गिरने से आईटीआई छात्र इंद्रजीत राजपूत की मौत होने पर भाजपा नेता रामलखन नापाखेड़ली ने गहरा दुख प्रकट किया और मृतक के गांव पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि यह बहुत ही दुखद घटना है।
आगे ऐसी घटना न हो, इसके लिए डीआरएम रेल मंडल झांसी को पत्र लिखकर नैरोगेज ट्रेन की छत पर सवारियों के बिठाने पर रोक लगाए जाने का अनुरोध किया जाएगा। इस दौरान उनके साथ भाजपा मंडल अध्यक्ष रामप्रसाद मीणा, हरिओम शर्मा, राजेन्द्र प्रताप सिंह चौहान सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

पहले भी हो चुके है हादसे
ट्रेन की छत से गिरकर छात्र इंद्रजीत राजपूत की मौत हो जाने संबंधी मामला कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी ट्रेन की छत से यात्रियों के गिरने की कई घटनाए घटित हो चुकी है। लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार ट्रेन की छत पर बैठकर यात्रा करने पर रोक नहीं लगाई जा रही है।

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