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अगर बढ़ा TEMPERATURE में अंतर, तो बर्बाद हो सकती है फसलें

Updated: IST cold wave
पूरे दिसंबर और जनवरी के पहले 10 दिनों तक सामान्य रहा जिले का मौसम अब लोगों को जीना मुश्किल कर रहा है। लगातार गिर रहे तापमान ने लोगों को ठिठुरा दिया है, या यूं कहें कि कोल्ड अटैक से हर कोई बेहाल है।

ग्वालियर। पूरे दिसंबर और जनवरी के पहले 10 दिनों तक सामान्य रहा जिले का मौसम अब लोगों को जीना मुश्किल कर रहा है। लगातार गिर रहे तापमान ने लोगों को ठिठुरा दिया है, या यूं कहें कि कोल्ड अटैक से हर कोई बेहाल है।

शुक्रवार को भी न्यूनतम तापमान में 0.4 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई और जैसे-जैसे पारा नीचे आ रहा है, फसलों पर पाला पडऩे का खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में यदि पाला पड़ा तो फसलों के लिए घातक साबित होगा। वहीं दूसरी ओर गिरते तापमान से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों में जहां निमोनिया और सर्दी-जुकाम का मर्ज बढ़ रहा है, वहीं वृद्धों में दमा अस्थमा तकलीफ देेने लगा है।

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कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक मौसम साफ हो, आसमान में बादल न हो, हवा न चले और रात का तापमान चार डिग्री की नीचे चला जाए तो पाला पडऩे की संभावना 100 फीसदी तक बढ़ जाते हैं। ऐसे में वर्तमान में तापमान चार डिग्री के आसपास ही है,लिहाजा जिले में पाला पडऩे की संभावना बन रही है, जिसके चलते किसान चिंतित हो उठे हैं। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ उपाय कर फसलों को पाले से बचाया जा सकता है, लेकिन कोल्ट अटैक की रफ्तार यही रही तो आगामी कुछ दिन फसलों के लिहाज से संवेदनशील है।

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नौनिहालों में बढ़ा निमोनिया व सर्दी जुकाम
कोल्ड अटैक से जहां लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई है, वहीं इस मौसम का लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यही वजह है कि अस्पताल की ओपीडी में भी प्रतिदिन पांच सैकड़ा से अधिक लोग पहुंच रहे हैं। मौसम से प्रभावित लोगों में बच्चों की संख्या ज्यादा है, जिन्हें निमोनिया व सर्दी जुकाम ने जकड़ लिया है। वहीं अन्य सर्दी जनित बीमारियां भी लोगों में घर कर रही हैं। हार्ट पेंशेंट को भी सर्दी से परेशानियां बढ़ गई हैं और इस सीजन में शहर में ही कई लोगों को अटैक आने के मामले सामने आए हैं।

इस सीजन सबसे ठंडी रात
लगातार गिर रहे पारे के बीच गलन और ठिठुरन बढ़ गई है। यही वजह है कि दिन में भी घरों और दफ्तरों में लोग गलन से परेशान हैं और यहां वहां धूप सेकते नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को भी न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री रिकार्ड किया गया है, जिससे गुरुवार-शुक्रवार की रात्रि इस सीजन की सबसे ठंडी रात रही। हालांकि अधिकतम तापमान हल्की बढ़ोत्तरी के साथ 19.4 डिग्री रिकॉर्ड हुआ, लेकिन जब तक न्यूनतम पारा गिरे, राहत नहीं मिलेगी।

जिला अस्पताल में इस सप्ताह की ओपीडी
9 जनवरी 925
10 जनवरी 616
11 जनवरी 615
12 जनवरी 460
13 जनवरी 500

फसलों को पाले से बचाव को ये करें
* फसलों में हल्की सिंचाई करें।
* रात्रि के समय खेत की मेढ़ पर फसलों के अवशेष जलाकर धुआं करें।
* थायोयूरिया एक ग्राम प्रति लीटर में घोलकर फसलों पर स्प्रे करें।

जिस तरह से तापमान में गिरावट आ रही है, उसे पाले की संभावना बढ़ रही है, क्योंकि मौसम भी साफ है। पाले से सरसों, धनिया, चना और अरहर सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली फसलें हैं। ऐसे में किसान भाई कुछ उपाय कर फसलों को पाले से बचा सकते हैं।
डॉ.प्रवीण कुमार गुर्जर, कृषि वैज्ञानिक, केवीके बड़ौदा

हवा बंद होने से दिन का तापमान गिरा है, लेकिन अभी रात के तापमान में बढ़ोत्तरी की संभावना कम ही है। इसलिए फिलहाल तो सर्दी से राहत की कोई उम्मीद नहीं हैं।
रमेश शर्मा, मौसम प्रेक्षक, श्योपुर

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