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अब डैमेज लिवर को जल्द ठीक करेगी गोल्ड नैनो मेडिसिन

Updated: IST Gold Nano Medicine
ग्वालियर।जीवाजी यूनिवर्सिटी(जेयू)की कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला व उनके शोधार्थियों की तीन साल की मेहनत रंग लाई है। उन्होंने पीलिया,कैंसर और हेपेटाइटस,टीबी जैसी बीमारियों से डैमेज लिवर को ठीक करने के लिए...

ग्वालियर। जीवाजी यूनिवर्सिटी (जेयू) की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला व उनके शोधार्थियों की तीन साल की मेहनत रंग लाई है। उन्होंने पीलिया, कैंसर और हेपेटाइटस, टीबी जैसी बीमारियों से डैमेज लिवर को ठीक करने के लिए पौधों के संग्लेषण से गोल्ड नैनो मेडिसिन बनाई है, जिसके उपयोग से लिवर को दोबारा जीवन मिलेगा और बीमारियों पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। वर्तमान में भारत का हर पांचवा व्यक्ति लिवर की समस्या से परेशान है।

वर्तमान में बाजार में उपलब्ध लिवर की दवाइयां महंगी हैं। गोल्ड नैनो टेक्नीक से बनी दवाइयां प्राकृतिक होने के साथ-साथ अन्य दवाइयों से करीब 40 प्रतिशत सस्ती होंगी। इस टेक्नीक के लिए दुबई के यूएई में आयोजित आठ वीं वल्र्ड कॉन्फ्रेंस ऑन टॉक्सीकॉलोजी एण्ड फार्माकॉलोजी में कुलपति सहित उनकी टीम के सदस्य आशा सिंह, साधना श्रीवास्तव, बीता यादव, छवि लोत्रा और सलीम खान को सम्मानित किया गया। साथ ही ऐसे शोधों को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों ने आर्थिक सहायता का आश्वासन भी दिया है। जेयू के इस शोधकार्य को थाईलैण्ड, यूएसए, ग्रीस, ईरान, मलेशिया, जर्मनी, पोलेण्ड, फ्रांस, यूएई के वैज्ञानिकों ने भी काफी सराहा।

ऐसे समझें नैनो टेक्नीक: दरअसल, जब लिवर किसी बीमारी की चपेट में आता है तो सबसे पहले लिवर का सुरक्षा चक्र यानि कोशिकाएं नष्ट होना शुरू हो जाती हैं। बाद में बीमारी लिवर के अंदर प्रवेश कर काम करना बंद कर देती है। डैमेज लीवर को सही करने के लिए गोल्ड नैनो मेडिसिन यानि हर्बल अर्क लिवर में पहुंचाया जाता है जो नई कोशिकाओं के निर्माण के साथ ही लिवर के इंफेक्शन को खत्म करता है। खास बात यह है कि इसका कोई साइडिफे क्स भी नहीं होता।

लंबे समय तक नहीं खानी होगी मेडिसिन : अधिकांश में गंभीर लीवर की बीमारी से पीडि़त व्यक्ति को करीब 6 से 8 माह या इससे अधिक समय तक दवाइयों का सेवन करना पड़ता है, लेकिन इस टेक्नीक में मरीज को सिर्फ दो माह के अंदर ही इतना फायदा मिलने लगेगा।

सफल रहा प्रयोग

हर्बल मेडिसिन के क्षेत्र में हमारा गोल्ड नैनो मेडिसिन का प्रयोग सफल रहा। इसका लाभ उन मरीजों को मिलेगा जिनका लिवर किसी बीमारी या अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसी कारण दुबई के वैज्ञानिकों ने हमारे शोध को न सिर्फ सराहा बल्कि शोधार्थियों को सम्मानित भी किया।

प्रो. संगीता शुक्ला, कुलपति, जेयू

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