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दिव्यांग को सहानुभूति नहीं प्यार की जरूरत

Updated: IST program photo
दिव्यांग बच्चों को किसी की सहानुभूति की नहीं बल्कि स्नेह की जरूरत होती है। दिव्यांग बच्चों को पहचान कर शिक्षक उन्हें शिक्षित करें और रोजगार दिलाने में भूमिका निभाएं।

ग्वालियर. दिव्यांग बच्चों को किसी की सहानुभूति की नहीं बल्कि स्नेह की जरूरत होती है। दिव्यांग बच्चों को पहचान कर शिक्षक उन्हें शिक्षित करें और रोजगार दिलाने में भूमिका निभाएं। यह बात डॉ. मंजुला पाटनकर ने कही। वे गुरुवार को डाइट में सांकेतिक भाषा एवं ब्रेल लिपि के दस दिवसीय प्रशिक्षिण शिविर के समापन पर बोल रही थीं।
प्रमाण पत्र तक न रहे सीमित
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाइट प्राचार्य उपेन्द्र भिड़े ने शिक्षकों से कहा कि यह प्रशिक्षण सिर्फ प्रमाण पत्रों तक सीमित न रहे। यहां जो कुछ आपने सीखा है उसका फायदा बच्चों को मिलना चाहिए तभी इस प्रशिक्षण की सार्थकता होगी। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि जिला विकलांग एवं पुर्नवास केन्द्र अधिकारी डॉ एसएम अवस्थी रहे। कार्यक्रम का संचालन समावेशी शिक्षा प्रभारी ओपी दीक्षित ने किया।

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