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आईआईटीटीएम में छात्रों के साथ हो रहा फर्जीवाड़ा!, जानिये कैसे?

Updated: IST iittm gwalior
इंस्टिट्यूटकी ओर सेइंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमर कंटक द्वारा संचालित एमबीए की एक वर्ष की डिग्री के 12 हजार रुपए की जगह लिए जा रहे हैं साढ़े तीन लाख रुपए, फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अभिभावकों ने डायरेक्टर के साथ अफसरों को भी खरी-खोटी सुनाई ।

ग्वालियर। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट (आईआईटीटीएम) में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। अधिकारी संस्थान के नाम का दुरुपयोग कर इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमर कंटक द्वारा संचालित एमबीए (एचआरडी) कोर्स में सैकड़ों छात्रों को एडमिशन दे दिया, लेकिन बीच सत्र में छात्रों को पता चला कि उनको डिग्री आईआईटीएम की नहीं, बल्कि अमरकंटक की लोकल यूनिवर्सिटी इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी की दी जाएगी।

इस फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही छात्रों ने अपने अभिभावकों से शिकायत की। जब अभिभावकों ने मामले का पता किया तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आईआईटीटीएम के नाम पर एक वर्षीय एमबीए (एचआरडी) की जो डिग्री यहां साढ़े तीन लाख में दी जा रही है, वहीं डिग्री संबंधित यूनिवर्सिटी में मात्र 12 हजार में मिलती है। छात्रों ने जब इस मामले में प्रबंधन से बात की तो उन्हें प्रताडि़त किया जाने लगा।
(छात्रों के अभिभावक डायरेक्टर व अन्य अधिकारियों से बहस करते हुए।)

अधिकारियों का कहना था कि वे आईआईटीटीएम की डिग्री छात्रों को नहीं देंगे, क्योंकि ये उनका कोर्स नहीं है। इस पर अभिभावकों ने काफी हंगामा मचाया और अधिकारियों को मौके पर खूब खरी-खोटी सुनाई। अभिभावकों का कहना था कि एडमिशन के लिए जो विज्ञापन दिया उसमें संबंधित यूनिवर्सिटी का जिक्र नहीं किया गया। इसलिए छात्रों ने आईआईटीटीएम के नाम पर एडमिशन लिया। हंगामे की खबर मिलते ही संस्थान ने विवि पुलिस को सूचित कर दिया।

एमओयू का दे रहे हवाला
अभिभावकों के साथ जब कुछ छात्रों ने संस्थान के डायरेक्टर संदीप कुलश्रेष्ठ से सीधी बात की तो उनका कहना था कि वे इस कोर्स के लिए आईआईटीटीएम की डिग्री नहीं दे सकते हैं। क्योंकि ये कोर्स इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक का है। इस पर अभिभावकों का कहना था कि फिर ये कोर्स संस्थान में किस नियम के तहत संचालित किया जा रहा है तो डायरेक्टर का कहना था कि संबंधित यूनिवर्सिटी के साथ उनका एमओयू हुआ है, लेकिन ओएमयू के तहत कोर्स कैसे संचालित किया जा सकता है? इस प्रश्न का जवाब उनके पास नहीं था।

पूछताछ करने पर छात्रों को किया प्रताडि़त
अभिभावक रामप्रताप का कहना था कि उनके बेटे वैभव ने एक वर्षीय एमबीए (एचआरडी) में एडमिशन लिया था, लेकिन जब फर्जीवाड़े का पता लगा तो उसने अपने दोस्त कपिल पुत्र दिनेश और अन्य साथियों को मामले से अवगत कराया। बस यहीं से अधिकारियों ने छात्रों को कभी ड्रेस तो कभी समय पर न आने के लिए प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। छात्रों का कहना है कि आधा सत्र बीत चुका है। डिग्री भी फर्जी है, ऐसे में कैसे उन्हें नौकरी मिलेगी।

'हम एमबीए की डिग्री आईआईटीटीएम संस्थान के नाम से नहीं दे सकते हैं। क्योंकि यह कोर्स दूसरी यूनिवर्सिटी का है, जिससे हमने एमओयू साइन किया है। हम इस डिग्री में अपना मोनो लगाने का विचार कर रहे हैं। '
- संदीप कुलश्रेष्ठ, डायरेक्टर, आईआईटीटीएम

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