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खदानों पर ऑटोमैटिक टीपी, वाहनों में लगेंगे जीपीएस

Updated: IST mines
अवैध खनन व उसके परिवहन पर मजबूती से नकेल कसने खदानों पर ऑटोमैटिक मशीनें लगेंगी। इनसे न केवल स्वचालित तरीके से परिवहन के लिए जरूरी ट्रांजिट पास (टीपी) जारी होगा, बल्कि खनिजों की ढुलाई करने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम भी लगेगा।

ग्वालियर. अवैध खनन व उसके परिवहन पर मजबूती से नकेल कसने खदानों पर ऑटोमैटिक मशीनें लगेंगी। इनसे न केवल स्वचालित तरीके से परिवहन के लिए जरूरी ट्रांजिट पास (टीपी) जारी होगा, बल्कि खनिजों की ढुलाई करने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम भी लगेगा। इसके लिए प्रत्येक खदान के निकास पर रिमोट सेंसर युक्त विशेष मशीन लगेगी, जो वाहनों का वजन भी तौलेगी।
जानकारी के मुताबिक अवैध खनिज व खदानों से समुचित खदाई की जानकारी हासिल करने का ये सिस्टम समूचे प्रदेश में प्रभावी होगा। हालांकि खनिज मंत्रालय ने अभी इसे प्रस्तावित किया है, उम्मीद है अगले एक-दो माह में ये सिस्टम प्रभावी हो जाएगा। दरअसल, शासन चाहता है, किस खदान से कितना खनिज, कितने बजे निकला इसकी जानकारी स्वचालित टीपी से तत्काल मिल सके।

वहीं, भोपाल में बुधवार को स्टेट जियोलॉजिकल प्रोग्रामिंग बोर्ड की बैठक में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अफसरों ने ग्वालियर में किए गए खनन पर प्रेजेंटेशन दिया। इसमें बताया, ग्वालियर के मोतीझील क्षेत्र में माइनिंग का पता लगा है। हालांकि यह आयरन उच्च गुणवत्ता का नहीं है। जीएसआई अफसरों ने इस अवसर पर प्रदेश के अन्य इलाकों में खोजे गए खनिजों की सिलसिलेवार जानकारी रखी। बैठक में मध्यप्रदेश माइन्स एवं भौमिकी विभाग के कम्प्यूटराईजेशन के लिए एक छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया, जिसमें भौमिकी एवं खनन के ग्वालियर इलाके के संचालक विनोद बागड़े, मनीष पालीवाल समेत छह एक्सपर्ट की टीम गठित की है। बागड़े ने बताया, जल्दी ही विभागीय गतिविधियों का कम्प्यूटराईजेशन शुरू कर दिया जाएगा।

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