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Photo Icon 575 रुपए देकर यहां मिलती थी 20 हजार की नौकरी

Updated: IST fake
नया बाजार में चल रहा था कॉल सेंटर सहित प्राइवेट कंपनियों में नौकरी का धंधा

ग्वालियर। नौकरी सिर्फ पढ़ाई-लिखाई से नहीं लगती, अगर इंटरव्यू देने का सलीका नहीं होगा तो पढ़ाई बेकार है। कंपनी के संपर्क में आए हो तो कॉल सेंटर और निजी टेलीफोन कंपनियों में तो कम से कम नौकरी पक्की समझो। यह कहकर बेरोजगारों को ठगने का गोरखधंधा चलाने वालों की शिकायत गुरुवार शाम करीब 50 बेरोजगारों ने कपंू पहुंचकर की। बेरोजगार ने बताया कि नया बाजार में बुक माई जॉब (बीएमजे) कंपनी इस तरह बेरोजगारों की भावनाओं से खेलकर उन्हें ठग रही है।

पुलिस ने नया बाजार से महिला सहित कंपनी के तीन कारिंदो व कंपनी कारोबार का हिसाब-किताब समेट लाई। पुलिस ने बताया बीएमजे कंपनी नायक साहब की बगिया में सेक्टर 11 रोहणी निवासी शशिभूषण श्रीवास्तव, मोनिका मोहाल निवासी गाजियाबाद सहित करीब 15 लोगों की टीम बीएमजे कंपनी चला रहे थे। कंपनी 575 रुपए में बेरोजगारों को 5 से 20 हजार रुपए महीने की नौकरी दिलाने का वादा कर रही थी।

इसके एवज में क्लाइंट को कॉल सेंटर, निजी टेलीफोन कंपनी, मालनपुर के कारखानों सहित प्राइवेट सेक्टर में कई जगहों पर नौकरी का वादा किया जा रहा था। इसके लिए संचालक शशिभूषण ने एजेंटस् की टीम भी रखी है जो बेरोजगारों को तलाश कर कंपनी का ग्राहक बनाती है। गुरुवार को बेरोजगारों की भीड़ ने कंपनी को फर्जी बताकर शिकायत की। पुलिस लाइन निवासी प्रवीण कुमार माहौर ने पुलिस को बताया बीएमजे के संचालकों ने उससे 575 रुपए लिए थे।

वादा किया था 7 दिन में कम से कम 15 हजार की नौकरी लग जाएगी। रजिस्ट्रेशन करने के बाद कंपनी दाल बाजार में निजी मोबाइल कंपनी के आफिस में इंटरव्यू के लिए भेजा,लेकिन नौकरी नहीं लगी। लौटकर कंपनी के आफिस पहुंचा तो कहा उसे इंटव्यू देने का सलीका नहीं है 1000 रुपए दो उसे साक्षात्कार की टे्रनिंग दी जाएगी। उनकी तरह कंपनी जितेन्द्र तोमर, दीपक शर्मा सहित करीब 200 लोगों से एक महीने के अंदर करीब 2 लाख से ज्यादा की ठगी कर चुकी है।

कॉल सेंटर का झांसा ज्यादा
कंपनी को ठग बता रहे बेरोजगारों का कहना था शशिभूषण और मोनिका ज्यादातर लोगों से कॉल सेंटर में नौकरी का वादा करते थे। गुरुवार शाम को बेरोजगार पुलिस को साथ लेकर कंपनी के ऑफिस पहुंचे वहां संचालक शशिभूषण और मोनिका सहित करीब 15 लोगों का स्टाफ था। एक कमरे में चल रही कंपनी की दीवार पर प्राइवेट सेक्टर के कई संस्थानों के नाम लिखे थे। तलाशी में पुलिस को रसीद कट्टा, रजिस्टर, और पेम्पलेटस् मिले हैं। सारे दस्तावेज सहित पुलिस संचालक शशिभूषण, मोनिका मोहाल सहित स्टाफ के कई लोगों को उठा लाई।

एजेंट ने पकड़वाया
पुलिस सूत्रों का कहना है शशिभूषण और मोनिका ने कई एजेंटस भी नौकरी पर रखे थे। इन्हें महीने में करीब 50 बेरोजगार को कंपनी से कनेक्ट कराने का टारगेट दिया जाता था। पिछले दो तीन महीने से एजेंटस् के काम में खामी बताकर संचालक उनका कमीशन और पगार रोक चुके थे। इससे तंग आकर एक एजेंट ने कुछ बेरोजगारों को कंपनी की खामियां बताकर पुलिस के पास भेज दिया।

जांच का दायरा
नौकरी और इंटरव्यू का सलीका सिखाने के नाम पर बेरोजगारों से पैसा वसूलने वाली कंपनी रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज में इंद्राज है।
जिन कंपनियों में बेरोजगारों को इंटरव्यू के लिए भेजती है उसका बीएमजे का लिखित अनुबंध है।
कंपनी कारोबार शुरू करने के बाद अब तक कितने बेरोजगारों से फीस वसूल चुकी है। इनमें कितने लोगों की नौकरी लगी है।

"फीस लेकर कंपनी किस तरह बेरोजगारों की नौकरी लगवा रही थी इसका पता लगाया जा रहा है। दस्तावेजों की जांच के और शिकायतकर्ताओं की बातों की तस्दीक कर कार्रवाई की जाएगी।"
महेश शर्मा कंपू टीआई

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