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Photo Icon कूनो-क्वारी एक्सप्रेस नाम से मशहूर थी 'जीवनरेखा', विश्व की सबसे लंबी नैरोगेज रेल लाइन ट्रे

Updated: IST neroguage train
श्योपुर से ग्वालियर की 198 किमी की दूरी भारतीय रेल की ऐतिहासिक विरासत दो फीट चौड़ी नैरोगेज रेल लाइन से तय होती है।

ग्वालियर। ऐतिहासिक और अद्वितीय रेललाइनों में शुमार श्योपुर-ग्वालियर नैरोगेज रेल लाइन न केवल श्योपुर जिले बल्कि ग्वालियर-चंबल संभाग के हजारों लोगों की जीवन रेखा है। यही वजह है कि पूरी एक सदी बाद भी लोगों को अपने गंतव्य पर पहुंचा रही है। श्योपुर से ग्वालियर की 198 किमी की दूरी भारतीय रेल की ऐतिहासिक विरासत दो फीट चौड़ी नैरोगेज रेल लाइन से तय होती है।

जिसे कभी कूनो-क्वारी एक्सप्रेस के नाम से भी जाना जाता था। इस रेलगाड़ी में यात्रा करने का अनुभव अपने आप में एक अजूबा है। इस ट्रेन की औसत गति लगभग 20 से 30 किमी प्रति घंटा है।

जो दो दर्जन से अधिक छोटे-छोटे स्टेशन पर रुकती हुई जाती है। इसमें सामान्यत: ग्रामीण अंचल के लोग यात्रा करते हैं। यात्रा के दौरान अंचल के सुंदर ग्रामीण क्षेत्र के साथ-साथ कल-कल करती नदियां एवं सुदूर हरी-भरी पहाडिय़ां यात्रा को मोहक बनाती हैं।

महत्व
भारतीय रेल की कुछ मुख्य नैरोगेज रेल लाइनें जो वर्तमान में संचालन में हैं। इनमें कालका-शिमला,न्यू जलपाईगुड़ी-दार्जिलिंग, पठान कोठ-जोगिंदरनगर, नेरल-माथेरान और ग्वालियर-श्योपुर ट्रेन शामिल है। बताया गया है कि श्योपुर-ग्वालियर नैरोगेज ट्रेक विश्व का सबसे लंबा नैरोगेज ट्रेक है।

इतिहास
ग्वालियर लाइट रेलवे खंड उन रेल खंडों में से एक है जिसका निर्माण ब्रिटिश शासन द्वारा नहीं किया गया। इस रेल खंड का निर्माण तत्कालीन महाराज माधवराव सिंधिया द्वितीय ने चार चरणों में 19वीं शताब्दी में करवाया था। विश्व का सर्वाधिक लंबा यह रेलखंड ग्वालियर-श्योपुर के बीच 28 छोटे गांव व नगरों को जोड़ता है।

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