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Video Icon खुदाई में निकला था शिवलिंग, गुप्तेश्वर महादेव पड़ा नाम

Updated: IST
क्षेत्र के हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है चारूवा का प्राचीन गुप्तेश्वर महादेव मंदिर

चारूवा/खिरकियाखिरकिया से करीब 8 किमी दूर स्थित प्राचीन गुप्तेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। कहा जाता है कि करीब ढाई सौ साल पहले टीले की खुदाई में यह शिवलिंग निकला था। इसके चलते यह गुप्तेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुए। महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों की श्रद्धा देखते ही बनती है। इतिहास में चंपावती नगरी तथा वर्तमान में अब चारूवा से मात्र डेढ़ किमी दूर हरिपुरा में कल-कल बहती बाणगंगा नदी के किनारे टीले पर स्थित शिवलिंग हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। बदलते परिवेष में अब यह आस्था के साथ पर्यटन स्थल भी बनता जा रहा है, जो तहसील की शान बन चुका है। शिवलिंग की स्थापना के बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इसके हजारों वर्ष पुराना होना इतिहास में दर्ज हैं। कथाओ में ही बताया गया कि गुप्तेश्वर मंदिर गुप्त स्थान से निकलने के कारण मंदिर का नामकरण गुप्तेश्वर किया गया है।

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स्वप्न दिया था भोलेनाथ ने

एक कथा यह भी प्रचलित है कि मंदिर के विषय में भोलेनाथ ने एक परिवार के मुखिया को स्वप्न में देकर कहा था कि चारूवा में मंदिर है, उसे बाहर निकालो। बताया जाता है कि भगवान भोलेनाथ ने दर्शन दिऐ और टीले के नीचे शिवलिंग होने की बात कही। प्रात: जब यह बात गांव में फैली और शिवलिंग ही नही अपिति समूचा मंदिर ही प्रकट हुआ। इसके बाद से यह क्षेत्र खशहाल होने लगा। मंदिर के बाजू में कल कल बहती नदी ने यहां के सौंदर्य को बढ़ाया है।

गुफा का रहस्य बरकरार

मंदिर के पीछे एक गुफा भी है, जिसका रहस्य बरकरार है। इसे पार करने की हिम्मत आज तक कोई नही उठा पाया है। इसके बारे में कोई कहता है यह मकड़ाई रियासत तक तो कोई सांगवा किले तक है। कुछ लोग चारूवा स्थित गढ़ी तक जाना बताते हैं। लेकिन वास्तविक स्थिति कोई नही बता पा रहा है।

महाभारत कालीन चक्रव्यूह

यहां स्थित महाभारतकालीन चक्रव्यूह आज भी रहस्य का विषय बना हुआ है। इसके स्थित होने से इस मंदिर को इसे महाभारत कालीन होने से नकारा नहीं जा सकता। यह लोगों की आस्था का केंद्र है। गुप्तेश्वर मंदिर भगवान के प्रकट होने के बाद गठित ट्रस्ट ने मंदिर परिसर का विस्तार करते हए हनुमान मंदिर स्थापित किया। इसके बाद गांव के दशोरे परिवार द्वारा राम, लक्ष्मण जानकी की मूर्तियां एक मंदिर में स्थापित की गई। बाद में नर्मदा मंदिर और दत्त भगवान की प्रतिमा स्थापित की गई। ट्रस्टी प्रवीण अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष विष्णु नामदेव ने बताया कि मंदिर के विस्तार की योजना प्रस्तावित है। शृद्धालुओं और क्षेत्रवासियो के सहयोग से मंदिर का विस्तार किया जाएगा।

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