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विपणन संघ ने 67 करोड़ दिए, किसानों के खातों में अब तक 35 करोड़ ही पहुंचे

Updated: IST Treasury Office Work
हकीकत कुछ और : उपज भुगतान के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे किसान

हरदा। समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने वाले किसानों को उपज का भुगतान कई दिन बाद भी नहीं मिल सका है। दूसरी ओर खरीदी एजेंसी विपणन संघ का दावा है कि सहकारी समितियों को अब तक करीब 67 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। इनमें से करीब 35 करोड़ किसानों के खातों में पहुंच चुका है, लेकिन ऐसा है नहीं। जिले की दो सहकारी समितियों को तो अब तक एक रुपए का भुगतान नहीं मिला। यहां के किसान पैसे के लिए समिति और सहकारी बैंक के चक्कर काट रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि जिले में 14 जून से मूंग खरीदी शुरू हुई थी। बाजार से प्रति क्विंटल करीब 2000 रुपए ज्यादा भाव मिलने के कारण मूंग की जमकर बिकवाली हुई। किसानों की बढ़ती संख्या देख प्रशासन को आनन-फानन खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ानी बढ़ी। किसानों को उम्मीद थी कि कुछ ही दिन में उन्हें भुगतान होने लगेगा। सरकार ने मूंग खरीदी की राशि स्वीकृत भी कर दी। विपणन संघ के माध्यम से इसे सहकारी समितियों को दिया गया। जिला विपणन अधिकारी प्रशांत वामनकर के मुताबिक जिले की 8 समितियों को करीब 67 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। इनमें से 35 करोड़ रुपए किसानों के खातों में ट्रांसफर हो चुके हैं। जिले के करीब 14000 किसानों से अब तक 35 हजार टन मूंग खरीदा जा चुका है।

छह में से चार सहकारी समितियों को ही मिली राशि

जिला सहकारी बैंक से संबद्ध छह सहकारी समितियां भी मूंग की खरीदी कर रही हैं। नोडल अधिकारी केसी सारन के मुताबिक चार समितियों को 21 करोड़ रुपए मिले थे। इसमें से 1186 किसानों को करीब 17 करोड़ रुपए बंट चुके हंै। टिमरनी बैंक से जुड़ी मनियाखेड़ी व छिदगांव मेल सहकारी समिति को एक रुपए का भुगतान नहीं हुआ। लिहाजा यहां मूंग बेचने वाले किसानों के खातों में रुपए ट्रांसफर नहीं हो सके। जिला विपणन अधिकारी समितियों को रुपए ट्रांसफर करते हैं। वे ही बता सकेंगे कि ऐसा क्यों हुआ।

खाद, बीज के लिए जेवरात गिरवी रखना मजबूरी बना

इधर, नकदी के अभाव में किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। खरीफ फसल के खाद, बीज के लिए उन्हें बाजार में जेवरात गिरवी रखकर साहूकारी कर्ज लेना पड़ रहा है। किसान कांग्रेस प्रदेश सचिव मोहन सांई ने बताया कि उन्होंने 17 जून को किसान सहकारी विपणन संस्था को मूंग बेचा था। करीब 3 लाख रुपए का भुगतान अब तक नहीं हो सका। ऐसे कई किसान संस्था और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। संस्था द्वारा अब तक 15 जून तक की गई खरीदी का ही भुगतान किया गया। बाकी किसानों को रुपए नहीं मिले। आर्थिक तंगी का सामना कर रहे किसान रकम गिरवी रखकर खाद, बीज की व्यवस्था कर रहे हैं। कई किसानों ने बैंकों से भी गोल्ड लोन लिया है। शासन, प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। आम किसान यूनियन के राम इनानिया ने बताया कि जितनी खरीदी हो चुकी उतना भुगतान नहीं हुआ। शुरुआत के दो दिन उपज बेचने वाले किसानों को ही राशि मिल सकी। बाकी किसान अब भी अपने ही रुपए मिलने के इंतजार में यहां-वहां भटक रहे हैं।

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