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ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को महिलाएं ऐसे पहचानें 

Updated: IST breast cancer
40 साल की उम्र के बाद माह में एक बार ब्रेस्ट परीक्षण कराना चाहिए।

ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह पाया गया है कि भारत में एक लाख महिलाओं में से 13 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीडि़त हैं। यह भी समझना आवश्यक है कि कैंसर का पता जितनी जल्दी लगाया जा सकेगा सरवाइवल रेट भी उतनी अधिक होगी। कैंसर की विभिन्न अवस्थाओं में इलाज के आधार पर जीवित रहने की संभावनाएं इतनी बढ़ जाती हैं-

फस्र्ट स्टेज : 95 से 100 प्रतिशत
सेकंड स्टेज : 70 से 80 प्रतिशत
थर्ड स्टेज : 50 से 60 प्रतिशत
फोर्थ स्टेज : 10 से 15 प्रतिशत

उम्र के हिसाब से जांचें
25 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को महीने में एक बार ब्रेस्ट का स्वत: परीक्षण करना चाहिए। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को प्रतिवर्ष नियमित अंतराल पर मैमोग्राफी करानी चाहिए। यदि डॉक्टर को कैंसर की आशंका होती है तो अल्ट्रासाउंड की सलाह दी जाती है।

टीका उपलब्ध नहीं
ब्रेस्ट कैंसर के लिए अभी तक कोई टीकाकरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए 40 वर्ष की उम्र के बाद मैमोग्राफी और स्वत: ब्रेस्ट परीक्षण करने की सलाह दी जाती है।

इन पर ध्यान दें
गांंठ होना
अधिकांश महिलाओं को ब्रेस्ट में गांठें महसूस होती हैं। अमूमन, ब्रेस्ट ऊतक थोड़े गंठीले होते हैं। अधिकतर मामलों में चिंता की बात नहीं होती। यदि गांठ कठोर या दूसरी ब्रेस्ट की तुलना में अलग लगे तो डॉक्टर से संपर्क करें।

त्वचा में बदलाव
ब्रेस्ट की त्वचा गड्ढेदार हो जाए, इसमें सिकुडऩ, लालिमा, सूजन और यह अधिक गर्म लगे तो कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
पीठ में दर्द
कभी-कभार ब्रेस्ट कैंसर में पीठ में भी काफी दर्द होता है। ऐसा ट्यूमर का रीढ़ और पसलियों में फैलने से होता है।

बांह के नीचे
कुछ मामलों में ब्रेस्ट कैंसर बांह के नीचे या कॉलर बोन के पास लिम्फ नोड तक फैल जाता है। इससे उस स्थान पर गांठ या सूजन हो जाती है। कई बार यह ब्रेस्ट टिश्यू में होने वाले असली ट्यूमर से पहले महसूस होने लगता है। कई मामलों में गांठों में दर्द नहीं होता।

अग्रभाग में परिवर्तन
निप्पल से फ्लूड निकलना परेशानी का कारण बन सकता है, लेकिन यह कैंसर की ओर कम ही संकेत करता है। यदि निप्पल से बिना दबाए डिस्चार्ज होता है या सिर्फ एक ब्रेस्ट से ऐसा हो रहा है और फ्लूड दूधिया होने के बजाय लाल व स्पष्ट है तो नजरअंदाज ना करें।

3 तरह से इलाज
रेडियोथैरेपी
इस उपचार में हानिकारक कोशिकाओं को नियंत्रित करने और खत्म करने के लिए आयनाइजिंग रेडिएशन का उपयोग किया जाता है। रेडियोथैरेपी में पांच सप्ताह का समय लगता है और इस पर लगभग एक लाख रुपए का खर्च आता है।

कीमोथैरेपी
कीमोथैरेपी कैंसर उपचार की वह प्रक्रिया है जिसमें रसायनिक तत्वों का प्रयोग किया जाता है। इसमें कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए एक या अधिक एंटी-कैंसर दवाओं का प्रयोग होता है। यह शरीर के किसी अन्य हिस्से में फैली कैंसरकारी कोशिकाओं को खत्म करने में भी उपयोगी है।

कीमोथैरेपी 3-4 महीनों के लिए दी जाती है और इसमें 1-2 लाख रुपए का खर्च आता है। टार्गेटेड थैरेपी कीमोथैरेपी का एक प्रकार है जो सामान्य कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाने के साथ ही कैंसर कोशिकाओं पर हमला करता है। इस थैरेपी का खर्च 15 लाख रुपए तक आता है।

सर्जरी
इस इलाज में सर्जरी से कैंसरकारी ऊत्तकों को हटाया जाता है और मरीज को पूरी तरह से स्वस्थ होने में 15 दिन लगते हैं। इसमें 70 हजार रुपए तक खर्च आता है।

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