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गणितज्ञ रामानुजन के जीवन पर बनी फिल्म देख रोने लगे US के दिग्गज

भारतीय गणितज्ञ पर आधारित फिल्म देखकर अमेरिका के दिग्गज ने सिर्फ इमोशनल हुए, बल्कि उनकी आंखों में आंसू भी आ गए…

Apr 28, 2016 / 02:10 pm

dilip chaturvedi

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सिलिकॉन वैली। विश्व विख्यात भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवासन रामानुजन के जीवन पर आधारित फिल्म द मैन हू न्यू इनफिनिटी की दुनियाभर में चर्चा है। बुधवार को इस फिल्म की अमेरिका के सिलीकॉन वैली में स्क्रीनिंग रखी गई। यह स्क्रीनिंग रूसी अरबपति और डिजिटल स्काई टेक्नालॉजी के संस्थापक यूरी मिलर ने की। इस मौके पर अमेरिका की 50 से ज्यादा जानी-मानी हस्तियों को रामानुजम को जानने का मौका मिला। मैथ्स को लेकर उनके स्ट्रगल और इसमें उनकी दिलचस्पी को देख ये लोग इमोशनल ही नहीं हुए, बल्कि कई लोगों को आंसू भी आ गए। यह फिल्म शुक्रवार को वल्र्डवाइड रिलीज हो रही है। 


हर शख्स की आंखे भीगी थीं…
फिल्म देखने के बाद फेसबुक फाउंडर मार्क जकरबर्ग और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने रामानुजन के नाम पर फाउंडेशन बनाने की घोषणा की। इस अवसर पर जकरबर्ग और पिचाई के साथ गूगल के फाउंडर सर्गेई ब्रिन, ओकुलुस वीआर के सीईओ ब्रेंडन इर्बी जैसी शख्सियतें मौजूद थीं। बता दें कि फिल्म देखन के बाद जब वो बाहर निकले, तो हर शख्स की आंखें भीगी हुई थीं।
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पटेल बने रामानुजन
ऑस्कर विनिंग मूवी में ‘स्लम डॉग मिलेनियम’ फेम देव पटेल रामानुजम के रोल में हैं, जबकि प्रोफेसर जी एच हार्डी का रोल जेरेमी आयरंस ने किया है।पटेल ने मैथ्स की बेहद मुश्किल इक्वैशन को समझने के लिए प्रोफेसर केन ओनो से मदद ली है।

एक नजर में रामानुजन…
रामानुजम का जन्म 22 दिसंबर 1887 को मद्रास के इरोड में हुआ था। महज 33 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। मैथ्स पर लिखे एक आर्टिकल ने उन्हें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जी.एच. हार्डी से मिलवाया। उन्हीं ने ही रामानुजम को इंग्लैंड बुलाया। यहां ट्रिनिटी कॉलेज में स्टडी शुरू की। मैथ्स को लेकर किए गए उनके एनालिसिस ने दुनियाभर में हलचल मचा दी। उनके जीवन के इसी ताने-बाने को फिल्म में बखूबी दर्शाया गया है।

सातवीं का स्टूडेंट, बीएससी स्टूडेंट्स को पढ़ाया मैथ्स…
10 साल की उम्र में हाई स्कूल में टॉप किया था। स्कॉलरशिप मिलने लगी। जब वे सातवीं में थे, तब बीएससी के बच्चों को मैथ्स पढ़ाते थे। 12 साल की उम्र में ट्रिगोनोमेट्री में महारत हासिल कर ली थी। सिर्फ मैथ्स में रुचि होने की वजह से इंटर में फेल हो गए। ऐसा कहा जाता है कि वे एक सवाल को हल करने में ही ज्यादा वक्त लगा देते थे, जिससे एग्जाम का समय निकल जाता था। ऐसे में स्कॉलरशिप बंद हो गई और आगे पढ़ाई भी रुक गई। वे मैथ्स की पहेलियां सुना कर साथियों का इंटरटेनमेंट करते थे। 17 साल की उम्र में बरनौली नंबर पर रिसर्च पूरी की।

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