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किसानों को खेत में कार्य करने दें साहब, आंदोलन व आत्मघाती कदम उठाने को विवश न करें

Updated: IST Hoshangabad
भूमि बंधक की जटिल प्रक्रिया पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने तहसीलदार के समक्ष जताई नाराजगी

सोहागपुर।

साहब पूरे जिले में केसीसी कर्ज जमा करने पर किसानों को राजस्व विभाग से भूमि बंधक से मुक्ति का दस्तावेज मिल जाता है। लेकिन सोहागपुर में हजारों रुपए किसान को व्यय करने पड़ते हैं। किसान चाहता है कि खेत में श्रम करे, लेकिन व्यवस्था उसे विवश कर रही है कि वो या तो खेतों में पेड़ों से लटक जाए, या जहर खा ले या फिर सडक़ पर शासन-प्रशासन का पुतला जलाए और बंदूक की गोली खाए। कृपया स्थिति में सुधार करें। उक्त समस्या कांग्रेस जिलाध्यक्ष पुष्पराज पटेल ने मंगलवार दोपहर तहसीलदार भास्कर गाचले के सामने रखी है।

नोड्यूज सक्षम दस्तावेज

पटेल ने गाचले को बताया कि अन्य तहसीलों में केसीसी की राशि मय ब्याज चुकाए जाने के बाद बैंकों से मिलने वाले नोड्यूज के बाद कम व्यय में ही किसानों को बंधक मुक्ति दस्तावेज राजस्व विभाग से मिल जाता है। लेकिन सोहागपुर में प्रक्रिया जटिल है, जिसमें किसानों को श्रम भी लगाना पड़ता है और धन भी। उन्होंने बताया कि किसानों को दुनिया भर के दस्तावेज बंधक मुक्ति दस्तावेज प्राप्ति के लिए जुटाने पड़ते हैं। जबकि बैंकों द्वारा दिए जाने वाले नोड्यूज के दस्तावेज सक्षम प्रमाणित दस्तावेज हैं। जिनके आधार पर बंधक मुक्ति दस्तावेज दिया जाना चाहिए। लेकिन पटवारी से लेकर अधिकारी तक किसान को सिर्फ और सिर्फ परेशान करते हैं। मामले में पटेल ने तहसीलदार से आग्रह किया है कि किसान हित में सामान्य प्रक्रिया का पालन कराने के निर्देश अधीनस्थों को दें।

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