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नागद्वारी यात्रा : मप्र. में मिनी अमरनाथ यात्रा

Updated: IST nagdwar yatra 2017
नागपंचमी ठीक पहले यहां 15 दिन के लिए पूरा गांव बसा दिया जाता है। नागद्बारी जाने वाले इस रास्ते में जहरीले सांपों को डेरा लगा रहता है। इस यात्रा के लिए ही 15 दिन के लिए पूरा गांव बसाया जाता है। दुर्गा पथ और रोमांचक यात्रा के बीच पचमढ़ी में नागद्वारी पद यात्रा अन्य प्रदेशों से आने वालों के लिए आस्था का मुख्य केन्द्र है।

पिपरिया/पचमढ़ी/होशंगाबादनागद्वारी की दुर्गम यात्रा मंगलवार से शुरू हो रही है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर नागद्वारी मार्ग के दरवाजे खोल दिए जाएंगे। यह यात्रा बाबा अमरनाथ की तरह की रोमांचक और खतरनाक है। यहां पर रास्ते में जहरीले सांपों से यात्रियों का सामाना होता है। यहां पर दुर्गम पहाड़ी पर 12 किमी की पैदल यात्रा पूरी कर श्रद्धालू काजरी गांव के पास गुफा में विराजे भोले शंकर के दर्शन करेंगे।
इधर, अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले से अलर्ट पुलिस पचमढ़ी के नागव्दारी मेला में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था करेगी। पुलिस मुख्यालय भोपाल से एसएएफकी दो कंपनियों को भी बुलाया है। एक कंपनी में 78 जवान शामिल रहते हैं। जोन स्तर से भी रायसेन, बैतूल एवं हरदा से भी 60 जवानों के बल को तैनात किया जा रहा है। संपूर्ण मेला के सुरक्षा प्रभारी एएसपी शशांक गर्ग रहेंगे। पचमढ़ी पीटीएस के 400 नव आरक्षकों को भी विभिन्न पाइंटों पर तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को तीन सेक्टर में बांटा गया है।

Nagdhari Yatra

15 दिन चलता है मेला
पचमढ़ी में हर साल सावन मास में नागद्वारी यात्रा होती है और 15 दिन तक चलने वाले नागद्वारी मेले का समापन नागपंचमी के दिन किया जाता है। केवल 15 दिन के लिए सतपुड़ा अंचल की सुरम्य वादियों में बसी ये सात पहाडिय़ां श्रद्धालुओं के हर-हर महादेव और जय नागदेव के जयघोष से गूंजती हैं। रास्ते में जहरीले सांप यहां-वहां मिलते हैं इनकी खासबात यह है कि यह किसी को भी डंसते नहीं।
प्रसिद्ध नागद्वारी यात्रा का रास्ता सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच आता है। वन विभाग यहां पर यात्रा के लिए 15 दिन की स्वीकृति देता है। टाइगर रिजर्व होने के कारण ही इस यात्रा के मुख्य ग्राम काजरी में रहने वाले 250 ग्रामीणों को कुछ वर्ष पूर्व यहां से हटा दिया गया था। साल में एक बार ही यह गांव फिर से आबाद होता है। इस गांव में पूरा मेला लगता है गांव के लोग फिर से अपने गांव में आकर नागद्वारी यात्रा करने वालों की सेवा में लग जाते हैं।

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कुछ प्रचलित कहानियां
नागद्वारी यात्रा का मुख्य केन्द्र सतपुड़ा अंचल की पहाडिय़ों में बसा गांव काजरी है। कहा जाता है कि गांव की काजरी नामक एक महिला ने संतान प्राप्ति के लिए नागदेव को काजल लगाने की मन्नत मानी थी। संतान होने के बाद जब वह काजल लगाने पहुंची तो नागदेव का विकराल रुप देखकर उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी, इसके बाद उस गांव का नाम काजरी पड़ा गया। बताया जाता है कि यात्रा की शुरुआत भी यहीं से होती है।
- दूसरी मान्यता है कि नागद्वारी यात्रा से कालसर्प दोष दूर होता है। नागद्वारी की पूरी यात्रा सर्पाकार पहाडिय़ों से गुजरती है। पूरे रास्ते ऐसे लगता है कि जैसे यहां की चट्टाने एक दूसरे पर रखी हैं। मान्यता है कि एक बार यह यात्रा कर लेने वाले का कालसर्प दोष दूर हो जाता है।

नागलोक से जुड़ी भीम की कथा
एक अन्य कथा जो नागलोक से जुड़ी एक भीम की कथा भी है, उल्लेखनीय है कि भीम के पास हजारों हाथियों के बराबल बल था, कहा जाता है कि यह बल उनको नागलोक से ही मिला था, महाभारत के अनुसार भीम के इस अद्भुत बल से दुर्योधन खुश नहीं था इसलिए उसने भीम को मारने के लिए युधिष्ठिर के सामने गंगा तट पर स्नान, भोजन और खेल का प्रस्ताव रखते हुए कई प्रकार के व्यंजन तैयार करवाए। भोजन में दुर्योधन ने भीम को विषयुक्त भोजन दे दिया था, उनके बेहोश होते ही दुर्योधन ने भीम को गंगा में डुबो दिया था, मूर्छित भीम नागलोक पहुंच गए थे जहां उनको विषधर नागडंसने लगे इससे भीम के शरीर में विष का प्रभाव नष्ट होते ही वह चेतना में आ गए थे, और वह नागों में मारने लगे इसके बाद कुछ नाग भागकर आपने राजा वासुकि के पास पहुंचे, वासुकि ने पहुंचकर भीम से परिचय लिया। वासुकि नाग ने भीम को अपना अतिथि बना लिया। नागलोक में आठ ऐसे कुंड थे, जिनका जल पीने से शरीर में हजारों हाथियों का बल आ जाता था। नागराज वासुकि ने भीम को उपहार में उन आठों कुंडों का जल पिला दिया। इससे भीम गहरी नींद में चले गए। आठवें दिन जब उनकी निद्रा टूटी तो उनके शरीर में हजारों हाथियों का बल आ चुका था। भीम के विदा मांगने पर नागराज वासुकी ने उन्हें उनकी वाटिका में पहुंचा दिया।

भक्तों को नुकसान नहीं पहुंचाते सांप
करीब 100 साल पहले शुरू हुई नागद्वारी की यात्रा कश्मीर की अमरनाथ यात्रा की तरह ही कठिन तथा खतरनाक है। कई मायनों तथा परिस्थितियों में तो यह उससे भी ज्यादा खतरनाक है। यहां पर ऊंची-नीची तथा दुर्गम पहाडिय़ों के बीच बने रास्तों पर यात्रियों के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं होती है। उनको अनवरत चलते ही रहना है। यात्रा करते समय रास्ते में सामना कई जहरीले सांपों से हो सकता है, राहत की बात है कि यह सांप भक्तों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

इस तरह की तैयारी
सोमवार को डयूटी दल, पुलिस अमला पचमढ़ी पहुंच गया है। मटकुली से लेकर काजरी और यात्रा क्षेत्र में 17 सहायक कंट्रोल रुम बनाए गए हैं। तहसील कार्यालय मुख्य कंट्रोल रुम रहेगा। सोमवार को जिले भर से डियूटी कर्मचारी, पुलिस बल पचमढ़ी पहुंच चुका है। पेयजल, बिजली सहित काजरी में श्रद्धालुओं के लिए 100 नि:शुल्क आवास बन गए है। कालाझाड़, काजरी आदि दुर्गम क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था की गई है। कम्यूनिकेशन प्लॉन मंगलवार को होगा इसमें यात्रा के हर क्षेत्र से सूचनाएं पुलिस और कंट्रोल रुम को व्यवस्थाओं के संदर्भ में जानकारियों का आदान-प्रदान होगा। सोमवार को नागद्वारी क्षेत्र में प्रवेश के लिए दुकानदारों को अनुमति दी गई। वही 40 महाराष्ट्रयन सेवा मंडल के करीब 2 हजार सदस्यों ने नागद्वार के दुर्गम मार्गांे पर भण्डारे संचालित करने डेरा जमा लिया है।

इसििलए है खास
12 किमी. पहाड़ी रास्ता
100 नि:शुल्क आवास बनाए
17 कंट्रोल रुम बनाए गए

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